
बांग्लादेश के नेशनल डे पर PM मोदी ने इंदिरा गांधी और वाजपेयी को कुछ ऐसे किया याद
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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'बांग्लादेश की आजादी के लिए संघर्ष में शामिल होना, मेरे जीवन के भी पहले आंदोलनों में से एक था. मेरी उम्र 20-22 साल रही होगी जब मैंने और मेरे कई साथियों ने बांग्लादेश के लोगों की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था. तब मैंने गिरफ्तारी भी दी थी.'
बांग्लादेश की आजादी के 50 साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर ढाका में हैं. बांग्लादेश के राष्ट्रीय दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पाएम मोदी ने कहा कि मैं आज भारतीय सेना के उन वीर जवानों को भी नमन करता हूं जो मुक्तिजुद्धों में बांग्लादेश के भाइयों-बहनों के साथ खड़े हुए थे. अपने भाषण के दौरान पीएम ने इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया. ढाका के नेशनल परेड स्कवॉयर से पीएम मोदी ने बांग्लादेश की आजादी में भारत के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रयास और उनकी महत्वपूर्ण भूमिका सर्वविदित है. उसी दौर में 6 दिसंबर 1971 को अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि हम न केवल मुक्ति संग्राम में जीवन की आहुति देने वालों के साथ लड़ रहे हैं लेकिन हम इतिहास को भी एक नई दिशा देने का प्रयत्न कर रहे हैं. मैंने भी गिरफ्तारी दी थीः पीएम मोदी उन्होंने कहा कि आज बांग्लादेश में अपनी आजादी के लिए लड़ने वालों और भारतीय जवानों का रक्त साथ-साथ बह रहा है. यह रक्त ऐसे संबंधों का निर्माण करेगा जो किसी भी दबाव से टूटेंगा नहीं. जो किसी भी कूटनीति का शिकार नहीं बनेंगे.
स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

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