
बरेली की होली वाली रामलीला वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल, 161 सालों से निकाली जाती है राम बारात
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बरेली की रामलीला होली वाली रामलीला के रूप में विश्व विख्यात है. इसीलिए इसे वर्ल्ड हेरिटेज के नाम से भी जाना जाता है. राम बारात फागुन की पूर्णिमा (छोटी होली) वाले दिन राम बारात निकाली जाती है. राम बारात में प्रभु श्रीराम की झांकी, भगवान नरसिंह की झांकी के अलावा सैकड़ों खुले ट्रॉली में बड़े-बड़े ड्रमों में रंग भरकर रखा जाता है.
दीवाली के समय अपने देश भर में रामलीलाओं को देखा होगा. लेकिन बरेली में होली के मौके पर दुनिया की ऐतिहासिक और इकलौती रामलीला होती है. होली वाली रामलीला ब्रिटिश काल में 1861 में शुरू हुई थी. ये रामलीला 161 सालों से लगातार हो रही है और फागुन की पूर्णिमा (छोटी होली) वाले दिन राम बारात निकाली जाती है. जो शहर के विभिन्न इलाकों से होकर निकलती है और पूरा शहर होली के रंगों में सराबोर हो जाता है.
बरेली की रामलीला होली वाली रामलीला के रूप में विश्व विख्यात है. इसीलिए इसे वर्ल्ड हेरिटेज के नाम से भी जाना जाता है. वर्ष 2008 में यूनेस्को ने इस रामलीला को वर्ल्ड हेरिटेज की लिस्ट में शामिल किया था. 2015 में बरेली की होली वाली रामलीला को विश्व धरोहर घोषित किया गया. यूपी सरकार के संस्कृति विभाग की ओर से हर वर्ष होली वाली रामलीला के लिए एक लाख रुपये की सहायता दी जाती है.
अंग्रेजो से जब बगावत चल रही थी तब उनसे मोर्चा लेने के लिए अंग्रेजों को मुंहतोड़ जबाब देने के लिए प्रभु श्रीराम की सेना बनाई गई, जिसके बाद बड़ी बमनपुरी में रामलीला का मंच शुरू हुआ. अंग्रेजों ने रामलीला को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वो इसमें सफल नहीं हो सके. 1861 में शुरू हुई ये रामलीला तब से निरंतर चली आ रही है. राम बारात फागुन की पूर्णिमा (छोटी होली) वाले दिन राम बारात निकाली जाती है. राम बारात में प्रभु श्रीराम की झांकी, भगवान नरसिंह की झांकी के अलावा सैकड़ों खुले ट्रॉली में बड़े-बड़े ड्रमों में रंग भरकर रखा जाता है. सभी ट्रॉली पर सैकड़ों हुरियारे होते हैं जो बड़े-बड़े पम्पों से एक दूसरे पर रंगों की बौछार करते हैं.
हुरियारों के ऊपर लोग रंगों की बरसात करते हैं तो मुस्लिम समुदाय के लोग फूलों से राम बारात का स्वागत करते हैं. बड़ी बमनपुरी से शुरू हुई राम बारात बिहारीपुर ढाल, कुतुबखाना घन्टाघर, नावेल्टी चौराहा, रोडवेज, बरेली कॉलेज, कालीबाड़ी, श्यामगंज, सिकलापुर, मठ की चौकी, कुतुबखाना, बड़ा बाजार, साहूकारा, किला, सिटी स्टेशन से डलाव वाली मठिया होती हुई बमनपुरी के नरसिंह मंदिर पर समाप्त होती है. राम बारात का दूसरा मोर्चा चाहबाई से निकलता है और वो कुतुबखाना से मुख्य बारात में शामिल होता है. इस दौरान देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लोग इस राम बारात को देखने आते है. विदेशी मीडिया भी इस राम बारात को कवरेज करने को आती है. हालांकि पिछले दो सालों से कोरोना की वजह से विदेशी मीडिया और विदेशी लोग नहीं आ रहे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि राम बारात में रंग और पानी की व्यवस्था जिला प्रशासन की होती है. इसके लिए फायर बिग्रेड की गाड़ियां और नगर निगम के टैंक होरियारों के साथ साथ चलते हैं ताकि होरियारों को पानी की कोई कमी न रहे. इसके साथ ही डीएम और एसएसपी राम बारात के साथ साथ चलते हैं. राम बारात की सुरक्षा के लिए पुलिस, पीएसी और पैरामिलिट्री फोर्स साथ चलती है. साथ ही सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन कैमरे भी राम बारात की सुरक्षा के लिए लगाए जाते हैं ताकि कोई उपद्रवी रंग में भंग न कर दे.

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