
'बंद करो ये खून-खराबा...', डोनाल्ड ट्रंप का दावा- रूस और यूक्रेन जंग खत्म करने की डील के हैं बेहद करीब
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि रूस और यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते के बेहद करीब हैं. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को एक उच्च स्तरीय बैठक करनी चाहिए, ताकि इस युद्ध को समाप्त किया जा सके.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए रोम पहुंचे हैं. उन्होंने इटली की राजधानी में लैंड करने के बाद अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर यूक्रेन-रूस युद्ध को लेकर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि दोनों देश युद्ध समाप्त करने को लेकर एक डील के बेहद करीब हैं. ट्रंप ने कहा कि इस संभावित शांति समझौते के लिए रूस और यूक्रेन के बीच प्रमुख बिंदुओं पर पहले ही सहमति बन चुकी है.
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपने पोस्ट में लिखा, 'अभी रोम पहुंचा हूं. रूस और यूक्रेन के साथ बातचीत और बैठकों का एक अच्छा दिन रहा. वे एक समझौते के बहुत करीब हैं, और दोनों पक्षों को अब बहुत उच्च स्तर पर मिलना चाहिए, ताकि इसे समाप्त किया जा सके. अधिकांश प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बन गई है. खून-खराबा अभी बंद करो. हम इस क्रूर और निरर्थक युद्ध को समाप्त करने में मदद करने के लिए जहां भी आवश्यक होगा, वहां मौजूद रहेंगे.'
मध्य पूर्व के लिए अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करने के लिए मास्को गए थे. इससे पहले, ट्रंप ने टाइम्स मैग्जीन को दिए इंटरव्यू में कहा था कि क्रीमिया रूस के साथ रहेगा, यह इस बात का नवीनतम उदाहरण है कि किस प्रकार वह यूक्रेन पर युद्ध समाप्त करने के लिए रियायतें देने का दबाव बना रहे हैं.
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उन्होंने सोशल मीडिया पर यह भी मांग की कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की लंबे समय से लटके 'रेयर अर्थ मिनरल्स डील' पर तुरंत हस्ताक्षर करें, जो अमेरिका को उनके देश के खनिज संसाधनों तक पहुंच प्रदान करेगा. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, 'वलोदिमीर जेलेंस्की के नेतृत्व वाले यूक्रेन ने अमेरिका के साथ बहुत महत्वपूर्ण रेयर अर्थ मिनरल्स डील के अंतिम कागजात पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. यह कम से कम तीन सप्ताह की देरी है. उम्मीद है कि इस पर तुरंत हस्ताक्षर हो जाएंगे. रूस और यूक्रेन के बीच समग्र शांति समझौते पर काम सुचारू रूप से चल रहा है. लगता है कि बहुत जल्द सफलता मिलेगी!'

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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