
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के करीबी के घर CBI का छापा, जम्मू-कश्मीर बीमा घोटाले में एक्शन
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सीबीआई ने जिन लोगों के घर छापा मारा है उनमें जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन गवर्नर सत्यपाल मलिक के मीडिया सलाहकार भी शामिल हैं.
जांच एजेंसी सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल के करीबियों के घर छापा मारा है. छापेमारी की ये कार्रवाई जम्मू-कश्मीर बीमा स्कीम घोटाले में की गई है. रिपोर्ट के अनुसार सीबीआई कुल 8 जगहों पर छापेमारी कर रही है. जिन लोगों के घर छापा मारा गया है उनमें जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन गवर्नर सत्यपाल मलिक के मीडिया सलाहकार भी शामिल हैं. सीबीआई की छापेमारी दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान में चल रही है.
बता दें कि बीमा घोटाले में सीबीआई ने 28 अप्रैल को सत्यपाल मलिक से लंबी पूछताछ की थी. ये पूछताछ सत्यपाल मलिक के निवास स्थान पर हुई थी. इससे पहले बिहार, जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय के राज्यपाल पद से रिटायर होने के बाद पिछले साल अक्टूबर में भी सीबीआई ने इस केस में पहली बार उनका बयान दर्ज किया था. सत्यपाल मलिक ने आरोप लगाया था कि जब वे जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे तो उस वक्त दो फाइलों को क्लियर करने के लिए उनसे रिश्वत की पेशकश की गई थी.
गौरतलब है कि सत्यपाल मलिक को 2018 में बतौर राज्यपाल केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर भेजा था. सत्यपाल मलिक के कार्यकाल में ही 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटा दिया था. इस दौरान सत्यपाल मलिक की भूमिका अहम रही भी. इसके बाद बतौर राज्यपाल सत्यपाल मलिक का तबादला मेघालय कर दिया गया था.
सत्यपाल मलिक ने कहा था कि उनके पास मंजूरी के लिए दो फाइलें आई थीं. इनमें से एक फाइल अनिल अंबानी की बीमा कंपनी और दूसरी आरएसएस से जुड़े व्यक्ति की थी. मलिक ने कहा कि ये व्यक्ति महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार में मंत्री थे और प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) का बहुत करीब होने का दावा करते थे.
पूर्व राज्यपाल मलिक ने कहा था कि मुझे दोनों विभागों के सचिवों द्वारा सूचित किया गया था कि ये एक घोटाला है और मैंने उसके अनुरूप ही दोनों डील्स को रद्द कर दिया था. तत्कालीन राज्यपाल मलिक ने यह भी बताया था कि सचिवों ने उनसे कहा था कि आपको हर फाइल को पास करने के लिए 150 करोड़ रुपये मिलेंगे.
मार्च 2022 में, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा था कि सत्यपाल मलिक द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और प्रशासन ने मामले को सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है. इसके बाद सीबीआई ने इस मामले में 2 FIR दर्ज किए हैं.

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