
पुतिन, जेलेंस्की और अब बाइडेन... 76 दिन में वॉर ट्रांयगल के तीन बड़े नेताओं से PM मोदी की मुलाकात के क्या मायने?
AajTak
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिलहाल अमेरिका के दौरे पर हैं. बीते 76 दिन में पीएम मोदी ने रूस-यूक्रेन जंग के तीन बड़े किरदार देश- रूस, यूक्रेन और अमेरिका का दौरा किया है. इस दौरान उन्होंने तीनों देशों के राष्ट्रपति से मुलाकात की.
लगभग ढाई साल पहले जब रूस और यूक्रेन के बीच जंग शुरू हुई थी, तब भारत ने न तो किसी का साथ दिया और न ही किसी का विरोध. भारत शुरू से कहता रहा कि वो सिर्फ 'शांति' चाहता है. भारत के इस 'न्यूट्रल' रवैये की आलोचना भी हुई. लेकिन अब धीरे-धीरे ही सही, भारत खुद को 'पीसमेकर' के तौर पर स्थापित करने में काफी हद तक कामयाब होता दिख रहा है.
अमेरिका दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा, 'पहले भारत सबसे समान दूरी की नीति पर चलता था. अब भारत सबसे समान नजदीकी पर चल रहा है. आज जब भारत वैश्विक मंच पर कुछ कहता है, तो दुनिया सुनती है. मैंने जब कहा- ये युद्ध का समय नहीं है, तो उसकी गंभीरता सबने समझी.'
पिछले महीने जब प्रधानमंत्री मोदी यूक्रेन के दौरे पर गए थे, तब उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी. इस दौरान रूस-यूक्रेन जंग से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा था, 'युद्ध में भारत का रुख कभी भी न्यूट्रल नहीं था, बल्कि वो हमेशा शांति का पक्षधर रहा है.'
इसी नीति के चलते भारत खुद को 'पीसमेकर' के तौर पर स्थापित करने में कामयाब रहा है. बीते 76 दिन में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन जंग के तीन बड़े किरदार देशों के राष्ट्रपतियों से मुलाकात की है और एक संदेश दिया है. 8 जुलाई को पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, 23 अगस्त को यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और 21 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात की. ये दिखाता है कि भारत ने अपने 'न्यूट्रल' रूख के कारण न सिर्फ रूस और यूक्रेन बल्कि अमेरिका के साथ भी अपने संबंधों को बेहतर बनाने में कामयाबी हासिल की है.
भारत कैसे बन रहा पीसमेकर?
8 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी रूस की यात्रा पर गए थे. तब उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन को गले लगाया था. मोदी का पुतिन को गले लगाना पश्चिमी देशों को पसंद नहीं आया.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









