
पहले नोरिएगा, अब मादुरो... दो राष्ट्रपति, जिनके लिए घातक साबित हुई 3 जनवरी की तारीख
AajTak
3 जनवरी की तारीख ने 35 साल बाद फिर से इतिहास दोहराया है. 35 साल पहले अमेरिकी डेल्टा फोर्स हल्के सैन्य संघर्ष में पनामा की हार के बाद वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति नोरिएगा को देश से निकाल ले गई थी. अब मादुरो को वेनेजुएला से बाहर ले जाया गया है.
अमेरिकी सेना ने आधी रात के बाद वेनेजुएला की राजधानी काराकस पर धावा बोल दिया. अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के सैन्य और सामरिक अड्डों पर बमबारी की, फिर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपनी गिरफ्त में लेकर न्यूयॉर्क के लिए रवाना हो गई. इस कार्रवाई को अमेरिकी सेना की डेल्टा फोर्स ने अंजाम दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अमेरिकी सेना को बधाई दी है और कहा है कि यह ऐसा हमला था, जैसा लोगों ने दूसरे विश्वयुद्ध के बाद नहीं देखा था.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने आगे कहा कि यह काराकस के बीच में एक मजबूत किले के खिलाफ कार्रवाई थी, जिससे तानाशाह निकोलस मादुरो को न्याय के कठघरे में खड़ा किया जा सके. निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद अमेरिकी डेल्टा फोर्स न्यूयॉर्क ले जा रही है. राष्ट्रपति ट्रंप ने मादुरो की एक तस्वीर भी जारी की है, जिसमें वह बेड़ियों में जकड़े हुए हाथों में पानी की बोतल लिए नजर आ रहे हैं. मादुरो की आंखों पर पट्टी भी बंधी दिख रही है.
निकोलस मादुरो को अमेरिका ले जाया जा रहा है और इस बीच अमेरिका में मादुरो के खिलाफ न्यायिक अभियोग शुरू करने की तैयारियां भी तेज हो गई हैं. अमेरिकी सीनेटर माइक ली ने दावा किया है कि मादुरो को आपराधिक आरोपों का सामना करने के लिए पकड़ा गया है. उन्होंने दावा किया है मार्को रुबियो ने उनको यह जानकारी दी है कि वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्रवाई के दौरान हमारा उद्देश्य ऑपरेटिव्स की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी था. इस पूरे ऑपरेशन को डेल्टा फोर्स ने अंजाम दिया.
यह भी पढ़ें: हाथों में हथकड़ी, आंखों पर पट्टी... अमेरिकी कब्जे में मादुरो, ट्रंप ने जारी की पहली तस्वीर
सद्दाम को डेल्टा फोर्स ने ही पकड़ा था
ईराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को पकड़ने का ऑपरेशन भी इसी डेल्टा फोर्स ने अंजाम दिया था. सद्दाम को ऑपरेशन रेड डॉन के तहत तिकरित के पास एक स्पाइडर होल से पकड़ा गया था. आईएसआईएस के सरगना अबू बकर अल बगदादी के खात्मे का मिशन भी इसी डेल्टा फोर्स ने अंजाम दिया था. डेल्टा फोर्स ने बगदादी को ऐसी मौत दी थी, कि उसकी पहचान की पुष्टि के लिए भी डीएनए टेस्ट का सहारा लेना पड़ा था.

अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है. अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने कहा है कि FBI, DEA, अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों के साझा ऑपरेशन में मादुरो को अमेरिकी हिरासत में लिया गया है. यह कार्रवाई ड्रग तस्करी और उससे जुड़े आपराधिक मामलों में चल रही कानूनी कार्रवाई के तहत की गई है.

इस समां दुनिया में कहीं युद्ध चल रहा है तो कहीं युद्ध की तैयारी चल रही है. देशों के अंदर ही गृहयुद्ध जैसे हालात बन रहे हैं. रूस-यूक्रेन जंग को करीब 1400 दिन हो चुके हैं. चीन-ताइवान में भी तनी हुई है. पश्चिम एशिया में हर दिन किसी ना किसी मोर्चे पर जंग की आहट है. दुनिया के कई देशों का भविष्य भी बड़े देशों की इसी खींचतान में फंसा है. देखें ये स्पेशल शो.

एशेज टेस्ट के पहले दिन सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में बॉन्डी बीच हमले के हीरो अहमद अल अहमद को खड़े होकर सम्मान दिया गया, जिन्होंने 14 दिसंबर 2025 को अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों की जान बचाई थी. चोटिल हाथ के साथ मैदान पर उतरे अहमद अल अहमद के लिए ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड दोनों टीमों ने गार्ड ऑफ ऑनर बनाया और पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा.

अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला करके पूरी दुनिया को सन्न कर दिया. निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया को आधी रात में अमेरिका लाया गया. अमेरिकी सेना का विमान न्यूयॉर्क के स्टुअर्ट एयर नेशनल गार्ड बेस पर उतरा. कड़ी सुरक्षा के बीच मादुरो को प्लेन से उतारा गया. प्लेन से उतरते वक्त वो लंगड़ाते दिखे. ट्रंप इस अभियान को बड़ी जीत बता रहे हैं. अब अमेरिका में मादुरे पर मुकदमा चलाने की तैयारी है. देखें विशेष.

वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद दुनिया दो खेमों में बंट गई है. रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान अमेरिकी कार्रवाई के विरोध में हैं, जबकि फ्रांस और इजरायल जैसे देश ट्रम्प के समर्थन में हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रूस और चीन की निंदा नीति ट्रम्प पर कोई प्रभाव डाल पाएगी. इसके अलावा सवाल यह भी है कि क्या ट्रम्प आगे किसी अन्य विरोधी देश पर भी कब्जा कर सकते हैं?

तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'बांग्लादेश में जिहाद के दो अलग रूप हैं. मदरसों से निकले और विश्वविद्यालयों में पढ़े-लिखे, दोनों की सोच भारत-विरोध को साझा लक्ष्य मानती है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भारत-बांग्लादेश के सांस्कृतिक रिश्ते टूटे तो कट्टरता को बढ़ावा मिलेगा. नफरत और हिंसा के बजाय संवाद, संस्कृति और शांति की मौजूदा हालात में समाधान है.'







