
पलक झपकने से पहले... 300 की स्पीड से खुलता है AIRBAG! बच्चों को कार में बैठाने से पहले जान लें सही तरीका
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ताजा मामला नवी मुंबई का है जहां एयरबैग के चलते एक 6 साल के मासूम की जान चली गई. दरअसल, यहां दो कारों की टक्कर के बाद एयरबैग खुलने से छह वर्षीय बच्चे की गर्दन पर तेज झटका लग गया. जिससे उसे गभीर रूप से चोट लगी और मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई.
सड़क हादसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए कारों में एयरबैग सबसे ज्यादा जरूरी सेफ्टी फीचर माना जाता है. लेकिन कई बार यही एयरबैग लोगों की जान भी ले लेता है. ताजा मामला नवी मुंबई का है जहां एयरबैग के चलते एक 6 साल के मासूम की जान चली गई. दरअसल, यहां दो कारों की टक्कर के बाद एयरबैग खुलने से छह वर्षीय बच्चे की गर्दन पर तेज झटका लग गया. जिससे उसे गभीर रूप से चोट लगी और मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई. तो क्या एयरबैग आपके बच्चों के लिए घातक साबित हो सकता है? आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताएंगे-
क्या होता है एयरबैग:
सबसे पहले यह समझ लें कि, आखिर 'AIRBAG' क्या होता है? एयरबैग आमतौर पर पॉलिएस्टर की तरह की मजबूत टेक्सटाइल या कपड़े से बना एक गुब्बारे जैसा कवर होता है. इसे ख़ास मैटेरियल से टेनेसिल स्ट्रेंथ (कपड़े की मजबूती) के लिए डिज़ाइन किया जाता है ताकि दुर्घटना के समय यात्रियों को सुरक्षित रखा जा सके. ये कार में किसी सेफ्टी कुशन की तरह काम करता है, जैसे ही वाहन से कोई इम्पैक्ट या टक्कर होती है ये सिस्टम एक्टिव हो जाता है.
कैसे काम करता है एयरबैग:
एयरबैग को सप्लीमेंट्री रिस्ट्रेंट सिस्टम (SRS) भी कहा जाता है. जैसे ही दुर्घटना होती है, SRS सिस्टम में पहले से ही इंस्टॉल किया गया नाइट्रोजन गैस एयरबैग में भर जाता है. ये पूरी प्रक्रिया पलक झपकते यानी कि कुछ मिली सेकंड में होती है. इसके बाद एयरबैग फूल जाता है और यात्री को एक बेहतर कुशनिंग के साथ सेफ्टी प्रदान करता है.
एयरबैग में होल्स यानी कि छेद दिए जाते हैं जो कि डिप्लॉय होने के बाद गैस को बाहर निकाल देता है. इन सारी प्रक्रिया के बीच गाड़ी की बॉडी की मजबूती का भी ख्याल रखा जाता है. ताकि किसी भी क्रैश के समय कार के भीतर बैठे व्यक्ति को ज्यादा नुकसान न हो और ज्यादा से ज्यादा इंपेक्ट एनर्जी गाड़ी ही झेल जाए, इसके लिए कार की बॉडी को मजबूत मेटल से तैयार किया जाता है.

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