
'नेता पार्टी से बड़े हो गए थे, इसलिए लगातार हारी कांग्रेस', MP में जीतू पटवारी का बड़ा बयान
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जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी से नेता बड़े हो गए तो पार्टी हारने लगी. इसलिए राहुल गांधी और खड़गे जी ने निर्णय लिया कि जो ताकत प्रदेश कांग्रेस के पास है, उसे अब कार्यकर्ताओं को देकर जिला और ब्लॉक अध्यक्ष का चयन किया जाएगा.
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी की लगातार हार के लिए कुछ नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है. हरदा जिले के दौरे पर संगठन चुनाव के तहत कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने इशारों में कहा कि कुछ नेता पार्टी से बड़े हो गए थे, जिसके कारण कांग्रेस ने लगातार 5 विधानसभा चुनाव, 5 लोकसभा चुनाव और स्थानीय पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम चुनावों में हार का सामना किया है.
जीतू पटवारी ने कहा, ''कांग्रेस पार्टी से नेता बड़े हो गए तो पार्टी हारने लगी. इसलिए राहुल गांधी और खड़गे जी ने निर्णय लिया कि जो ताकत प्रदेश कांग्रेस के पास है, उसे अब कार्यकर्ताओं को देकर जिला और ब्लॉक अध्यक्ष का चयन किया जाएगा. कार्यकर्ताओं को गंभीर रहना होगा.'' उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन चुनाव में सक्रिय रहकर सही व्यक्ति का चयन करने की अपील की.
संगठन को मजबूत करने की कवायद प्रदेश में कांग्रेस के सृजन अभियान के तहत संगठन को मजबूत करने की कोशिश चल रही है. हालांकि, पटवारी के बयान से लगता है कि पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है. उन्होंने पूर्व नेताओं पर इशारों में निशाना साधते हुए कहा कि अब कांग्रेस पहले वाली नहीं रही. उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव भी यह समझ गए हैं कि यह पुरानी कांग्रेस नहीं है.
BJP पर हमला, किसानों के मुद्दे उठाए पटवारी ने भाजपा सरकार को किसान विरोधी करार देते हुए जमकर प्रहार किया. उन्होंने कहा कि भाजपा किसानों की फसलों को समर्थन मूल्य पर नहीं खरीद रही. हालांकि, जब कांग्रेस ने आंदोलन शुरू किया और विपक्ष की भूमिका निभाई, तो मुख्यमंत्री ने मूंग खरीदी की घोषणा की.
पटवारी ने तंज कसते हुए कहा, ''मुख्यमंत्री कहते हैं कि उन्होंने कांग्रेस के डर से मूंग खरीदी शुरू नहीं की, बल्कि वे किसान हितैषी हैं. अगर वे किसान हितैषी हैं, तो गेहूं 2700 रुपये और धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल क्यों नहीं खरीदते?''
उन्होंने लाड़ली बहना योजना पर भी सरकार को घेरा. पटवारी ने कहा, ''लाड़ली बहनों को 3000 रुपये देने का वादा था, लेकिन 1250 रुपये दिए जा रहे हैं. रक्षाबंधन पर 250 रुपये देने की बात कह रहे हैं, जबकि 250 रुपये में तो एक किलो मिठाई भी नहीं आती.''

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