
नागरी प्रचारिणी सभा में लोकतंत्र की बहाली, हिंदी प्रेमियों में खुशी की लहर
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हिंदी की प्रतिष्ठित नागरी प्रचारिणी सभा में लोकतंत्र की बहाली हो गई है. स्थानीय अदालत ने नए चुनाव कराए जाने के आदेश दिए हैं. चुनाव पर विवाद बीते 15 वर्षों से चला आ रहा था. हिंदी के उत्थान के लिए यह संस्था लगातार काम करती आई है.
हिंदी भाषा प्रेमियों, हिंदी पर शोध और अध्ययन करने वालों के लिए अच्छी खबर है. हिंदी के सम्मान और प्रचार-प्रसार के लिए वाराणसी नागरी प्रचारिणी के दिन एक बार फिर से बहुरने वाले हैं. 15 वर्षों से चले आ रहें नागरी प्रचारिणी सभा के प्रबंध समिति के विवाद पर प्रशासन की ओर विराम लगाते हुए नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दे दिया गया है. संस्कृति कर्मी व्योमेश शुक्ल की लिखित शिकायत को स्वीकार करते हुए वाराणसी के उपजिलाधिकारी सदर प्रमोद कुमार पांडेय की अदालत ने नए चुनाव कराने का आदेश जारी कर दिया है. इस आदेश से यह उम्मीद जग उठी है कि 1893 से स्थापित इस संस्था में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियां, शब्दकोश, ग्रंथ, 50 हजार से ज्यादा हस्तलेख, हिंदी के अनुपल्ध ग्रंथों का विशाल संग्रह संरक्षित हो सकेगा..
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

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