
'धुरंधर' देख छलका एक्टर का दर्द, कट गए फिल्म से सीन, पैरेंट्स के साथ देखी थी मूवी
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'धुरंधर 2' के एक एक्टर ने खुलासा किया है कि फिल्म के फाइनल कट से उनके सीन काट दिए गए थे. उन्होंने इस पर अपना रिएक्शन दिया है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि फिल्म की सफलता के बीच उनका नजरिया कैसे बदल गया.
आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई, और रिलीज के बाद से ही यह फिल्म जबरदस्त चर्चा में है और दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच रही है. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म जबरदस्त कमाई कर रही है और कई रिकॉर्ड तोड़ रही है. अब फिल्म की इस शानदार सफलता के बीच एक्टर विक्रम भाम्बरी, जो इस फिल्म के दूसरे पार्ट का भी हिस्सा हैं, ने अपने कुछ सीन काटे जाने पर निराशा जाहिर की है.
हाल ही में विक्रम भाम्बरी, जो रणवीर सिंह की इस फिल्म में 'शकील कमांडो' का किरदार निभा रहे हैं. उन्होंने अपने सीन हटाए जाने के बारे में बात की.
इस मामले पर बात करते हुए भाम्बरी ने द टाइम्स ऑफ इंडिया' से बताया कि हालांकि उन्हें इतनी बड़ी फिल्म का हिस्सा बनकर बहुत अच्छा लगा, लेकिन स्क्रीन पर उनका समय कम होना निराशाजनक था. उन्होंने बताया कि एडिटिंग, जो शायद फिल्म के फाइनल कट को बेहतर बनाने के लिए की गई थी, उसक वजह से उनके काम का एक बड़ा हिस्सा बड़े पर्दे पर नहीं दिख पाया.
विक्रम भाम्बरी ने क्या कहा? अपने ऑडिशन के दिनों को याद करते हुए एक्टर ने कहा, 'उस समय मुझे लगा कि यह किसी आतंकवादी जैसा नाम लग रहा है. लेकिन फिर मैंने खुद से कहा कि कम से कम मेरा कोई नाम तो है, और मैं सिर्फ एक एक्स्ट्रा कलाकार नहीं हूं. थिएटर में हम सीखते हैं कि अगर आपके किरदार का कोई नाम होता है, तो इसका मतलब है कि आपका किरदार अहम है. बाद में, जब हमने काम शुरू किया, तो हमें बताया गया कि हम एक गैंग के सदस्य हैं; हम रणवीर के साथ थे. यह सुनकर बहुत अच्छा लगा.'
विक्रम ने बताया कि फाइनल कट में उनके कई सीन काट दिए गए थे. उन्होंने कहा, 'लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई, तो मुझे स्क्रीन पर अपनी उतनी मौजूदगी और पहचान नहीं दिखी, जितनी हमने शूट की थी. जब मैंने अपने माता-पिता के साथ फिल्म का पहला पार्ट देखा, तो मुझे बहुत दुख हुआ. एक एक्टर को पहचान चाहिए होती है, इसलिए मैं कुछ दिनों तक परेशान रहा, क्योंकि मेरे कई सीन, जिन्हें हमने शूट किया था, काट दिए गए थे; शायद कुछ ऐसे कारणों से जिन्हें टाला नहीं जा सकता था. लेकिन यह मेरे लिए बहुत निराशाजनक था. मेरे माता-पिता मुझे समझाते रहे कि मुझे शुक्रगुजार होना चाहिए, लेकिन दिल हमेशा उनकी बात नहीं सुनता.'
उन्होंने आगे बताया कि एक डिलीवरी बॉय के साथ हुई एक अचानक मुलाकात के बाद चीजें बदल गईं. विक्रम को याद आया कि दूसरे दिन एक डिलीवरी एग्जीक्यूटिव ने उन्हें पहचान लिया और बताया कि उसने उन्हें 'धुरंधर' में देखा था. जिससे उनका हौसला तुरंत बढ़ गया.













