
धीरे-धीरे आर्थिक संकट से उभर रहा है श्रीलंका, 2021 के बाद पहली दर्ज हुई सकारात्मक वृद्धि
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आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका की स्थिति में अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है. जनगणना और सांख्यिकी विभाग (डीसीएस) ने बताया कि साल 2021 की चौथी तिमाही के बाद 2023 की तीसरी तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि दर सकारात्मक वृद्धि दर 1.6 प्रतिशत बताई गई है. बता दें कि देश की अर्थव्यवस्था 2021 की चौथी तिमाही से नकारात्मक बनी हुई है.
श्रीलंका के जनगणना और सांख्यिकी विभाग (डीसीएस) ने शुक्रवार को एक प्रेस नोट में बताया कि तीसरी तिमाही के लिए साल-दर-साल जीडीपी वृद्धि दर सकारात्मक वृद्धि दर 1.6 प्रतिशत बताई गई है.
अप्रैल 2022 में दिवालिया घोषित होने पर श्रीलंका ने शून्य से 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी. देश की अर्थव्यवस्था 2021 की चौथी तिमाही से नकारात्मक बनी हुई है.
2024 में सुधार सकते हैं हालात अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इस सप्ताह की शुरुआत में 2.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट की दूसरी किस्त जारी करते हुए कहा कि 2023 के लिए श्रीलंका की ओवरऑल वृद्धि नेगेटिव रहेगी. हालांकि, 2024 में देश की अर्थव्यवस्था सकारात्मक वृद्धि के साथ बढ़ने की उम्मीद है.
श्रीलंका इस समय सख्त आईएमएफ आधारित नियमों से गुजर रहा है. राष्ट्रपति और वित्त मंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने विपक्ष की कड़ी आलोचना के बावजूद सुधारों पर जोर दिया है. इन सुधारों से 2024 में द्वीप के चुनाव वर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है. विक्रमसिंघे ने इस सप्ताह संसद को बताया कि जनता के सामने आने वाली कठिनाइयों के बावजूद सुधार जरूरी हैं.

अमेरिका ने ईरानी तेल पर 30 दिन की छूट दी, लेकिन ईरान ने एक्स्ट्रा तेल होने से इनकार कर दिया. दोनों के दावों से वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. दुनियाभर के मुल्क ये उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अमेरिकी की ओर से छूट मिलने के बाद ईरान का तेल उन्हें मिलेगा. लेकिन, ईरान के बयान से सभी को बड़ा झटका लगा है.

ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटिश संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान का अबतक का सबसे बड़ा हमला है. वहीं ईरान ने ब्रिटेन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ब्रिटेन अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने देता है तो इसे सीधे आक्रामक कार्रवाई में भागीदार माना जाएगा.

ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान काअबक का सबसे बजड़ा हमला है. डिएगो गारर्सिया बोहद रणनीतिक सैन्य अड्डा है. B-52 बॉम्बर विमान, लंबी दूरी के हमले के हथियार इस बेस पर मौजूद है.

ईरान युद्ध के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग होकर काम कर रहा है. हालांकि यह साफ संकेत मिल रहा है कि दोनों देश अभी भी रणनीतिक रूप से साथ हैं और ‘गुड कॉप-बैड कॉप’ की भूमिका निभा सकते हैं. हाल के घटनाक्रमों ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग चल रहा है या रणनीति का हिस्सा है?

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ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सख्त प्रतिक्रिया दी है. व्हाइट हाुस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने युद्धविराम पर बात करते हुए कहा कि अमेरिका बातचीत कर सकता है, लेकिन युद्धविराम पर कोई विचार नहीं है. साथ ही येभी कहा कि जब सामने वालो पक्ष को अमेरिका पूरी तरह से नष्ट कर रहा है तो युद्धविराम नहीं होगा.







