
देश की 259 जगहों पर कल बजेगा युद्ध का सायरन, सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल में आपको करने होंगे ये 5 काम
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देश के जिन 259 जिलों में जंग का साइरन बजेगा, इनमें वो जिले और शहर शामिल हैं जो पाकिस्तान से बॉर्डर साझा करने वाले हैं, जहां जरूरी रक्षा संस्थान, पावर ग्रिड, बंदरगाह, रिफाइनरी और अन्य जरूरी फैक्ट्रियों हैं. तटीय जिले हैं जहां से दुश्मन के जहाज हमले कर सकते हैं और घनी आबादी वाले शहर जहां हमले से ज्यादा नुकसान हो सकता है, वहां भी मॉक ड्रिल होने जा रही है.
भारत-पाकिस्तान के बीच पहलगाम हमले के बाद 14 दिन से जारी तनाव के बीच 259 जगहों पर बुधवार को मॉक ड्रिल होगी. इसके साथ ही बुधवार और गुरुवार को पाकिस्तान की सीमा पर भारतीय वायुसेना का युद्धाभ्यास होगा. चरण दर चरण भारत ने पिछले 14 दिन में बहुत तैयारी की है. अब पाकिस्तान के खिलाफ अंतिण चरण आ चुका है. जहां भारत ने हवाई युद्धाभ्यास के लिए NOTAM जारी किया है.
भारतीय वायुसेना भारत-पाकिस्तान सीमा पर रेगिस्तानी क्षेत्र और आस-पास के इलाकों में अभ्यास करेगी. इसमें राफेल, मिराज 2000 और सुखोई-30 सहित कई लड़ाकू विमान हिस्सा लेंगे. नोटम का मतलब होता है मतलब होता है कि 'नोटिस टू एयरमैन'. इस नोटिस के माध्यम से एयरस्पेस बंद होने की जानकारी, रनवे बंद या लाइटों में बदलाव की स्थिति के बारे में तुरंत जानकारी दी जाती है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये अपनी तैयारियों को जांचने, आजमाने का आखिरी हिस्सा है?
सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का ट्रेलर मंगलवार को भी देश के कई शहरों में देखने को मिला. कई शहरों में ब्लैकआउट का अभ्यास किया गया और सुरक्षा व्यवस्था देखी गई. देश के जिन 259 जिलों में जंग का साइरन बजेगा, इनमें वो जिले और शहर शामिल हैं जो पाकिस्तान से बॉर्डर साझा करने वाले हैं, जहां जरूरी रक्षा संस्थान, पावर ग्रिड, बंदरगाह, रिफाइनरी और अन्य जरूरी फैक्ट्रियों हैं. तटीय जिले हैं जहां से दुश्मन के जहाज हमले कर सकते हैं और घनी आबादी वाले शहर जहां हमले से ज्यादा नुकसान हो सकता है, वहां भी मॉक ड्रिल होने जा रही है.
क्या होती है सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल?
सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल एक ऐसा अभ्यास होता है जिसमें वास्तविक परिस्थितियों की तरह ही हवाई हमले के सायरन बजाए जाते हैं, शहरों को ब्लैकआउट किया जाता है, नागरिकों को सुरक्षित आश्रयों में ले जाया जाता है और इमरजेंसी टीमें अपनी भूमिका निभाती हैं. इसका मकसद नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना और आपदा के समय घबराहट, भ्रम और नुकसान को कम करना होता है.
सिविल डिफेंस जिले वे विशेष रूप से चिन्हित जिले होते हैं, जहां आपदा या युद्ध जैसी आपात परिस्थितियों में नागरिकों की सुरक्षा और सहायता के लिए विशेष प्रबंधन और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है. इन जिलों में सरकारी तंत्र, पुलिस, अर्धसैनिक बलों और नागरिक स्वयंसेवकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है.

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