
दुनिया में चल रही कुल लड़ाइयों में 40 फीसदी अफ्रीका में, फिर क्यों वहां शांति दूत नहीं मंडरा रहे?
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युद्ध की बात करें तो इन दिनों सबसे ज्यादा खून अफ्रीका में बह रहा है. इंटरनेशनल रेड क्रॉस कमेटी (आईसीआरसी) मानती है कि अफ्रीका में 50 से ज्यादा सशस्त्र संघर्ष चल रहे हैं. यह दुनिया में हो रही कुल लड़ाइयों का 40 फीसदी है. लेकिन जंग का जिक्र आने पर रूस-यूक्रेन या इजरायल-हमास पर ही चिंता दिखती है.
बीते चार सालों से कई देश लगातार युद्ध में लगे हुए हैं. इनमें पहला नाम रूस और यूक्रेन का आता है. मॉस्को से खुद को बचाने के लिए करीब-करीब पूरा यूरोप एकजुट होकर यूक्रेन के साथ आ गया. मिडिल ईस्ट में गाजा पट्टी हमास और इजरायल का मैदान बनी हुई है. हाल में अमेरिका ने कई देशों को धमकाना शुरू किया. लेकिन ये तमाम लड़ाइयां मिलकर भी अफ्रीकी संघर्ष के आगे कुछ नहीं. इसके बाद भी अफ्रीका नजरअंदाज किया जाता रहा.
क्या कहता है डेटा
इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रॉस (आईसीआरसी) के मुताबिक अफ्रीका में लगभग 50 से ज्यादा सक्रिय युद्ध एक साथ चल रहे हैं. ये दुनिया भर में चल रहे कुल कन्फ्लिक्ट का 40 फीसदी है, यानी हर 10 में 4 लड़ाइयां यहीं होती हैं. पिछले कुछ सालों में यह आंकड़ा भी बढ़कर 45 फीसदी के आसपास पहुंच गया.
यूरोप से तुलना करें तो इस साल यूरोप में भी कई कनफ्लिक्ट्स हैं लेकिन अफ्रीका से कहीं कम हैं. सबसे बड़ा युद्ध रूस-यूक्रेन के बीच है, जो फरवरी 2022 से जारी है. यूरोप के कुछ हिस्सों में सीमावर्ती या लोकल तनाव भी हैं, लेकिन इनका स्तर खुले संघर्ष से काफी कम है. मतलब यूरोप की लड़ाइयां कम हैं, लेकिन उनका इंटरनेशनल असर ज्यादा है. यूएन समेत तमाम बड़े मंच उन्हीं की बात कर रहे हैं. सारे शांति प्रयास वहीं के लिए हो रहे हैं.
कहां-कहां चल रही लड़ाइयां
सूडान में लगभग तीन सालों से देश की दो बड़ी फोर्स उलझी हुई हैं. सूडानी आर्मी और पैरामिलिट्री फोर्स के बीच लड़ाई राजधानी तक पहुंच चुकी. इससे आम लोग भी अछूते नहीं रहे. संघर्ष में हजारों लोग मारे जा चुके, जबकि लाखों लोग देश के भीतर या बाहर पलायन कर गए.

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