दिल्ली से दूसरे राज्यों में शिफ्ट होंगे खूंखार गैंगस्टर? तिहाड़ जेल प्रशासन ने दिल्ली सरकार को भेजा प्रस्ताव
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तिहाड़ जेल में इस वक्त करीब 10 से ज्यादा गैंगस्टर हैं और 100 से अधिक उनके गुर्गे यहां बंद हैं. जेल में गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया और प्रिंस तेवतिया की हत्या के बाद लगातार तिहाड़ की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं. इसको ध्यान में रखते हुए ये प्रपोजल दिया गया है.
दिल्ली की तिहाड़ जेल में लगातार गैंगवार के मामले सामने आने के बाद जेल प्रशासन अलर्ट है. इसको लेकर अब जेल प्रशासन ने दिल्ली सरकार को एक लिखित प्रपोजल भेजा है. तिहाड़ जेल के टॉप सूत्रों के मुताबिक इस प्रपोजल में गैंगस्टरो को लेकर मांग की गई है. सुरक्षा को लेकर ये प्रपोजल दिया गया है. इसमें कहा गया है कि तिहाड़ जेल में बंद खूंखार गैंगस्टर्स को देश के दूसरे राज्यों के जेलों में शिफ्ट किया जाए. इन्हें केरल से लेकर जम्मू-कश्मीर तक की जेलो में शिफ्ट करने का प्रपोजल दिया गया है.
दरअसल, इस वक्त तिहाड़ जेल में करीब 10 से ज्यादा गैंगस्टर हैं और 100 से अधिक उनके गुर्गे यहां बंद हैं. जेल में गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया और प्रिंस तेवतिया की हत्या के बाद लगातार तिहाड़ की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं. इसको ध्यान में रखते हुए ये प्रपोजल दिया गया है. बताया गया है कि तिहाड़ जेल द्वारा केजरीवाल सरकार के दिए गए पत्र में ये भी लिखा है कि ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर एक्ट में संशोधन किया जाए, ताकि किसी भी राज्य की जेल से दूसरे राज्य की जेल में अपराधियों को ट्रांसफर किया जा सके. फिलहाल नियम ये है कि किसी दूसरे स्टेट में कैदियों का ट्रांसफर करने के लिए उस स्टेट की परमिशन लेनी होती है.
डीजी तिहाड़ ने भी बढ़ाई थी अपनी सुरक्षा
बता दें कि 14 अप्रैल को तिहाड़ में गैंगस्टर प्रिंस तेवतिया और 2 मई को टिल्लू ताजपुरिया की हत्या कर दी गई थी. जेल में हुई इन दो हत्याओं के बाद डीजी तिहाड़ ने जेल में शख्त एक्शन लिया. उन्होंने 11 मई को 99 जेल स्टाफ का ट्रांसफर कर दिया था. इसके अलावा तिहाड़ जेल में तैनात तमिलनाडु स्पेशल पुलिस (TNSP) के सात कर्मियों को वापस तमिलनाडु भेज दिया गया. टिल्लू की हत्या के समय सातों जवान वहीं मौजूद थे. जेल में सख्ती करने को लेकर एहतियात के तौर पर डीजी तिहाड़ ने अपनी सुरक्षा बढ़ा ली थी.
9 साल, 12 वारदात, 9 मर्डर
पिछले 9 सालों में तिहाड़ जेल में गैंगवार की कुल 12 बड़ी वारदात हो चुकी हैं, जिनमें 9 कैदियों की मौत हुई है. जबकि इन गैंगवार में कुछ जेल कर्मियों समेत कुल 47 लोग घायल हुए हैं. अब सवाल ये है कि हाई सिक्योरिटी जेल होने के बावजूद आखिर गैंगवार का ये सिलसिला बंद क्यों नहीं होता है? तो जवाब है जेल में क्षमता से दो गुने से भी ज्यादा कैदियों का बंद होना और जेल में व्याप्त भ्रष्टाचार.

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