
दिल्ली में अनोखा Marriage Fair, 50 से 90 साल तक के पुरुष और महिलाएं हुईं शामिल
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अहमदाबाद के एनजीओ की ओर से एक मैरिज फेयर का आयोजन कराया गया, जिसमें केवल 50 साल पार लोगों को ही एंट्री मिली. संस्था की ओर से बताया गया कि इस सम्मेलन में 50 से 90 साल के बीच के 70 पुरुष और 30 महिलाओं ने भाग लिया.
इंसान को बुढ़ापे में अकेलापन बहुत परेशान करता है. इसलिए लोग एक समय तक अपना पार्टनर ढूंढ ही लेते हैं, लेकिन किसी वजह से अगर उनका पार्टनर बिछड़ता है तो ऐसे में स्थिति और भी खराब हो जाती है. इसी अकेलापन से बचने के लिए दिल्ली में एक अनोखा मैरिज फेयर आयोजित किया गया, जिसमें केवल 50 साल की पार उम्र के लोगों की ही एंट्री थी. इस अनूठे फेयर में 50 से 90 साल के 70 पुरुष और 30 महिलाओं ने पार्टिसिपेट किया.
अहमदाबाद के अनुभव फाउंडेशन की ओर से आयोजित वरिष्ठ नागरिक साथी परिचय सम्मेलन का आयोजन दिल्ली के महाराजा अग्रसेन भवन में कराया गया. एनजीओ के अध्यक्ष नाटुभाई पटेल ने बताया कि इस फेयर का आयोजन वरिष्ठ नागरिकों के बीच अकेलेपन की बढ़ती समस्या को कम करने के साथ ही प्यार और साथ पाने की नई शुरुआत करने का अवसर देना है.
गाजियाबाद से मैरिज फेयर में पहुंची थी बुजुर्ग महिला
न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए गाजियाबाद के राजनगर से आईं 68 वर्षीय ममता शर्मा ने अपने एक्सपीरिएंस साझा किए. उन्होंने कहा, "एजुकेशन बहुत मायने रखती है. मैं एक विधवा हूं और मैंने 2006 में अपने पति को खो दिया था, तब मेरी बेटी सिर्फ नौ साल की थी. अब वो 25 साल की हो चुकी है और जॉब करती है. उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने ही इस फेयर के बारे में उन्हें बताया था.
ममता शर्मा ने कहा, "उनका मानना है कि लोगों से मिलने में कोई समस्या नहीं है और जीवन किसी भी समय बेहतरी के लिए बदल सकता है. इसलिए वह मुझे दूसरे मौके के लिए यहां ले आईं."
उन्होंने विधवाओं के प्रति समाज की धारणा की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ परिवार उन्हें बोझ समझते हैं. उन्होंने कहा, "मेरी पुरानी दोस्त जिसने अपने पति को खो दिया है, अपने बेटे के परिवार के साथ रहती है, लेकिन वो अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि इसलिए क्योंकि वे एक नौकरानी का खर्च नहीं उठा सकते. मैं उसकी स्थिति से वाकिफ हूं." उन्होंने ऐसी अकेली महिलाओं से आगे आने और अपने लिए कुछ करने का आग्रह किया.

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