
'दशकों की लूट अब नहीं चलेगी...', कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का एक और बड़ा वार, 10 से बढ़ाकर 15% किया ग्लोबल टैरिफ
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अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने वैश्विक टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान किया है. उनका कहना है कि कई देश दशकों से अमेरिका का फायदा उठा रहे थे और यह कदम घरेलू उद्योगों को मजबूत करने के लिए जरूरी है. विशेषज्ञों के मुताबिक इस फैसले से भारत समेत निर्यात आधारित अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है और वैश्विक व्यापार में तनाव की आशंका भी बढ़ेगी.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्लोबल टैरिफ को लेकर बड़ा ऐलान किया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि अमेरिका तत्काल प्रभाव से दुनिया भर के देशों पर लागू 10 प्रतिशत टैरिफ को बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि कई देश दशकों से अमेरिका का 'फायदा उठाते' रहे हैं और यह फैसला उसी के जवाब में लिया जा रहा है.
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यह कदम पूरी तरह कानूनी दायरे में है और पहले से परीक्षण किया जा चुका है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन नए और 'कानूनी रूप से लीगल' टैरिफ की घोषणा करेगा. उनके मुताबिक, यह नीति अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए जरूरी है. ट्रंप आने वाले समय में कई देशों पर नए टैरिफ दरें लागू कर सकते हैं.
'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' का जिक्र किया राष्ट्रपति ने अपनी पोस्ट में 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार इसी दिशा में काम कर रही है और नए टैरिफ उसी रणनीति का हिस्सा हैं. उन्होंने दावा किया कि अब तक उठाए गए कदम 'बेहद सफल' रहे हैं और आगे भी अमेरिका को फायदा होगा.
क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट? ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया कि इस फैसले का उद्देश्य अमेरिकी विनिर्माण (Manufacturing) को बढ़ावा देना और व्यापार घाटे को कम करना है. ट्रंप ने विश्वास जताया कि यह प्रक्रिया 'अमेरिका को पहले से कहीं अधिक महान' बनाने (MAGA) के उनके मिशन को सफल बनाएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत सहित दुनिया भर की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्थाओं पर गहरा असर पड़ सकता है.
वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टैरिफ बढ़ोतरी लागू होती है तो वैश्विक व्यापार पर इसका असर पड़ सकता है. खास तौर पर अमेरिका के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार करने वाले देशों के निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है. साथ ही, जवाबी टैरिफ की आशंका भी बढ़ सकती है, जिससे व्यापारिक तनाव तेज हो सकता है.
फिलहाल, ट्रंप प्रशासन की ओर से विस्तृत सूची और समयसीमा जारी होना बाकी है. बाजार और वैश्विक साझेदार अब अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं.

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