
'तालिबान बनना चाहता है चीन', गुस्से में ये क्यों बोला ताइवान?
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ताइवान ने कहा है कि चीन तालिबान की तरह उस पर कब्जा करना चाहता है. चीन के विदेश मंत्री विदेश मंत्री जोसेफ वू ने शनिवार को चीन पर तालिबान के नक्शे-कदम पर चलने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनका देश ताइवान पर चीनी क्षेत्र के रूप में दावा करने वाले बीजिंग के साम्यवाद या मानवता के खिलाफ अपराधों के अधीन नहीं होना चाहता.
ताइवान ने कहा है कि चीन तालिबान की तरह उस पर कब्जा करना चाहता है. चीन के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने शनिवार को चीन पर तालिबान के नक्शे-कदम पर चलने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनका देश ताइवान पर चीनी क्षेत्र के रूप में दावा करने वाले बीजिंग के साम्यवाद या मानवता के खिलाफ अपराधों के अधीन नहीं होना चाहता. (फोटो-रॉयटर्स) अमेरिका समर्थित अफगान सरकार के पतन ने ताइवान में इस बात को लेकर गरमागरम बहस छेड़ दी है कि क्या उन पर चीन हमला कर सकता है और तालिबान की तर्ज पर कब्जा कर सकता है? चीन का सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स लिख चुका है कि जो अमेरिका अफगानिस्तान में तालिबान को रोक नहीं पाया वो ताइवान में चीन को क्या रोक पाएगा? ग्लोबल टाइम्स ने अपनी संपादकीय में लिखा कि ताइवान को अमेरिका पर भरोसा नहीं करना चाहिए. (फोटो-रॉयटर्स)
अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप को ईरान में हुई मौतों, नुकसान और बदनामी के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 'अपराधी' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में हालिया अशांति अमेरिका की साजिश है और ट्रंप ने खुद इसमें दखल देकर प्रदर्शनकारियों को उकसाया.

व्हाइट हाउस ने गाजा को फिर से बसाने और उस पर शासन के लिए बने 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों की लिस्ट जारी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सदस्य होंगे. देखें दुनिया आजतक.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.








