
तारिक रहमान की जीत ने बिगाड़ा जमात-PAK का गेम, फिर भारत को क्यों चेता रहे एक्सपर्ट्स
AajTak
बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बीएनपी ने दो-तिहाई से अधिक सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की है, जबकि जमात-ए-इस्लामी गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है. जमात की हार से बांग्लादेश में पाकिस्तान का राजनीतिक प्रभाव कमजोर होगा. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को अब भी सतर्क रहने की जरूरत है.
बांग्लादेश की राजधानी ढाका के मोगबाजार इलाके में स्थित जमात-ए-इस्लामी के हेडक्वार्टर के बाहर भारी सन्नाटा है, मनहूसियत छाई हुई है. शुक्रवार आधी रात तक पार्टी के नेता और कार्यकर्ता वहीं मौजूद थे और बार-बार कह रहे थे कि वो सरकार बनाने जा रहे हैं. लेकिन अब नतीजों ने साफ कर दिया है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) चुनाव जीत गई है और देश के नए प्रधानमंत्री होंगे पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान.
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, चुनाव में हार के बाद शुक्रवार सुबह पार्टी के बाहर इक्के-दुक्के जमात कार्यकर्ता और पत्रकार दिखे. कार्यकर्ताओं के चेहरों पर उदासी और माहौल बेहद भारी था.
इस हार ने जमात को करारा झटका तो दिया ही है, साथ ही जमात की हार से पाकिस्तान का गेम भी बिगड़ गया है जो वो जमात के साथ मिलकर अंजाम देने वाला था.
तारिक रहमान की वापसी और BNP की जीत
60 साल के तारिक रहमान दिसंबर 2025 में 17 साल के निर्वासन के बाद लंदन से बांग्लादेश वापस लौटे हैं. उनकी मां खालिदा जिया के निधन के बाद वो BNP के चेयरमैन बने. चुनाव में BNP ने दो-तिहाई से ज्यादा सीटें (लगभग 212) जीतीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के 11-पार्टी गठबंधन को सिर्फ 77 के आसपास सीटें मिलीं.
तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों सीटों से जीत हासिल की है और अब वो शनिवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं.

अमेरिका ने ईरानी तेल पर 30 दिन की छूट दी, लेकिन ईरान ने एक्स्ट्रा तेल होने से इनकार कर दिया. दोनों के दावों से वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. दुनियाभर के मुल्क ये उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अमेरिकी की ओर से छूट मिलने के बाद ईरान का तेल उन्हें मिलेगा. लेकिन, ईरान के बयान से सभी को बड़ा झटका लगा है.

ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटिश संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान का अबतक का सबसे बड़ा हमला है. वहीं ईरान ने ब्रिटेन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ब्रिटेन अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने देता है तो इसे सीधे आक्रामक कार्रवाई में भागीदार माना जाएगा.

ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान काअबक का सबसे बजड़ा हमला है. डिएगो गारर्सिया बोहद रणनीतिक सैन्य अड्डा है. B-52 बॉम्बर विमान, लंबी दूरी के हमले के हथियार इस बेस पर मौजूद है.

ईरान युद्ध के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग होकर काम कर रहा है. हालांकि यह साफ संकेत मिल रहा है कि दोनों देश अभी भी रणनीतिक रूप से साथ हैं और ‘गुड कॉप-बैड कॉप’ की भूमिका निभा सकते हैं. हाल के घटनाक्रमों ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग चल रहा है या रणनीति का हिस्सा है?

इजरायल ने एक बार फिर ईरान पर हवाई हमला किया है. इजरायल द्वारा ईरान पर लगातार हमले जारी है. इजरायली हमलों से लगातार ईरान में तबाही मची हुई है. ईरान की राजधानी तेहरान इन हमलों से सबसे ज्यादा ग्रसित है, जहां लोग इन हमलों के बीच डर में रहने को मजबूर है. तेहरान के की इलाकों को इस हमले में निशाना बनाया गया.








