
ट्रूडो के इस फैसले से किसे ज्यादा नुकसान? खुद फंसेगा कनाडा... भारत का कुछ नहीं बिगड़ेगा
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इस साल के आखिर तक भारत-कनाडा के बीच व्यापारिक डील पूरी होने की उम्मीद थी. लेकिन अब भारतीय राजनयिक के निष्कासन के ट्रूडो के फैसले ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है.
भारत (India) और कनाडा (Canada) के रिश्तों में खालिस्तान को लेकर तल्खी बढ़ती जा रही है. जस्टिन ट्रूडो के पीएम पद पर बने रहने तक अब भारत कनाडा के साथ द्विपक्षीय व्यापार की बातचीत का रास्ता भी बंद करने से परहेज नहीं करेगा. इससे पहले भी सरकार ने खालिस्तान समर्थकों पर कनाडाई सरकार के रुख पर चिंता जताई थी. लेकिन इससे अलग हटकर भारत ने व्यापार को राजनीति से अलग करने को तरजीह दी थी. कनाडाई पीएम के जी-20 के दौरान दिल्ली आने पर भी सरकार ने साफतौर पर अपनी चिंताएं ट्रूडो को बता दी थीं.
लेकिन सोमवार को संसद में कनाडाई पीएम के बयान के बाद माना जा रहा है कि 2025 तक जारी जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान भारत का अब कनाडा के साथ बातचीत की टेबल पर वापस आना मुश्किल है. हालांकि ट्रूडो ने मंगलवार को अपना रुख नरम करते हुए सफाई दी थी कि वो इस मुद्दे को और 'उकसाना या बढ़ाना' नहीं चाहते हैं.
क्या अटक गई भारत-कनाडा की ट्रेड डील? इसके बावजूद अब भारत-कनाडा की ट्रेड डील अटकना तय लग रहा है. दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता काफी समय से चल रही है जिसमें हाल के समय में तेजी भी आई थी. इसके बाद 2023 के आखिर तक भारत-कनाडा के बीच व्यापारिक डील पूरी होने की उम्मीद थी. लेकिन अब भारतीय राजनयिक के निष्कासन के ट्रूडो के फैसले ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है.
हालांकि इस डील के अटकने से भारत से ज्यादा नुकसान कनाडा को होगा, क्योंकि भारत के लिए कनाडा के साथ व्यापार समझौते से होने वाले फायदे सीमित हैं. इसकी वजह है कि निर्यात के एक बड़े हिस्से पर ज्यादा टैक्स नहीं लगता है. कपड़ों से जुड़े सीमा शुल्क में कटौती का इस ट्रेड डील से अनुमान था, जिससे भारतीय निर्यात को फायदा मिलता. इसके अलावा प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स की आवाजाही के मामले में भी ट्रेड डील से फायदा मिल सकता है. वहीं कनाडा के लिए, डेयरी और कृषि उत्पाद प्रमुख एरिया थे.
कनाडा को ट्रेड डील अटकने से ज्यादा नुकसान इस तरह दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार को बेहतर बनाने के लिए एक डील पर काम करने में लगे हुए थे. अनुमान है कि पिछले साल भारत-कनाडा व्यापार 8.2 अरब डॉलर का था. इसमें कनाडा भारत का 35वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था. वैसे दोनों देशों के बीच व्यापार समान रूप से संतुलित है. कनाडाई पेंशन फंडों के लिए भारत हमेशा से निवेश के लिहाज से आकर्षण रहा है. कनाडा के पेंशन फंड CPPIB ने भारत में करीब 1.21 लाख करोड़ का निवेश किया हुआ है. ये निवेश लॉन्ग टर्म को ध्यान में रखकर किया गया है. इसके अलावा ब्रुकफील्ड और कनवरजेंट फाइनेंस का भी भारत में अच्छा खासा निवेश है.

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