
टैरिफ पर सवाल उठाने वाली अमेरिकी कंपनियों को ट्रंप की कड़ी चेतावनी, बोले- अगर कीमतें बढ़ाई तो...
AajTak
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉलमार्ट जैसी कंपनियों को टैरिफ के कारण कीमतें न बढ़ाने की सख्त हिदायत दी है. वॉलमार्ट की कीमतें कम रखने की कोशिश है, जबकि ट्रंप ने कहा कि कंपनी अरबों कमा रही है. उन्होंने कहा कि कस्टमर्स के लिए कीमतें नहीं बढ़ाई जानी चाहिए.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्थानीय कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे टैरिफ की वजह से सामानों की कीमतें नहीं बढ़ा सकते. खासतौर से वॉलमार्ट से कहा गया है कि टैरिफ के कारण कीमतें नहीं बढ़नी चाहिए. वॉलमार्ट एक रिटेल कंपनी है, और टैरिफ की वजह से स्थानीय मार्केट में रिटेल स्टोर पर कीमतें बढ़ने की संभावना है, और कंपनी ने कहा था कि अगले महीने से कीमतें बढ़ाएगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने एक सोशल पोस्ट में कहा, "वॉलमार्ट को कीमतें बढ़ाने के लिए टैरिफ को जिम्मेदार ठहराना बंद कर देना चाहिए. वॉलमार्ट ने पिछले साल अरबों डॉलर कमाए, जो उम्मीद से कहीं ज्यादा है." उन्होंने दबी जुबान में वॉलमार्ट और चीन का एक साथ जिक्र किया और कहा, "जैसा कि कहा जाता है वॉलमार्ट और चीन को, और कहा "Eat The Tariff" और ये की वैल्यूड कस्टमर्स से कोई शुल्क नहीं लेना चाहिए."
यह भी पढ़ें: ट्रंप ने पहले कहा भारत ने जीरो टैरिफ की पेशकश की, अब बोले- मुझे डील को लेकर हड़बड़ी नहीं
कंपनी ने कहा- कीमतें कम ही रखेंगे!
अमेरिकी रिटेल कंपनी वॉलमार्ट का कहना है कि वे पूरी कोशिश कर रहे हैं कि कीमतें कम से कम रखी जाएं, और ये कि यह सिलसिला नहीं रुकेगा. रॉयटर्स के मुताबिक कंपनी ने कहा, "छोटे खुदरा मार्जिन की वास्तविकता को देखते हुए हम कीमतें यथासंभव कम रखेंगे."
वॉलमार्ट के सीईओ डग मैकमिलन ने कहा कि रिटेलर्स सीमित रिटेल मार्जिन के कारण सभी टैरिफ लागतों को वहन नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि फिर भी कपनी यह सुनिश्चित करेगी कि चीन से आने वाले सामानों पर, खासतौर से खाद्य पदार्थों पर कीमतें नहीं बढ़ाएगी.

बांग्लादेश में आगामी 12 फरवरी के चुनाव से पहले अमेरिकी राजदूत की जमात-ए-इस्लामी प्रमुख डॉ शफीकुर रहमान से मुलाकात ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है. इस बातचीत का फोकस चुनाव, राज्य सुधार, अर्थव्यवस्था, व्यापार और रोहिंग्या संकट पर रहा. अमेरिका की जमात से बढ़ती नजदीकियों को आगामी चुनाव में उसके संभावित बड़े रोल से जोड़कर देखा जा रहा है.

अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में हाल में एक संघीय अधिकारी की गोली से नर्स एलेक्स जेफ्री प्रेटी की मौत हो गई थी. जिसके बाद से अमेरिका में पुलिस और फेडरल एजेंसियों की कार्रवाई, विरोध-प्रदर्शनों में जाने वालों और आम नागरिकों की जान की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. इस बीच वॉशिंगटन में प्रेटी की याद में लोगों ने कैंडल मार्च निकाला. देखें अमेरिका से जुड़ी 10 बड़ी खबरें.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.







