
झारखंड के चुनावी रिंग में अगर जयराम महतो की पार्टी JLKM नहीं होती तो नतीजे कुछ और होते, जानिए कहां-कहां बिगड़ा NDA का गेम
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झारखंड चुनाव नतीजों में इंडिया ब्लॉक की जीत के बाद जयराम महतो फैक्टर भी चर्चा में है. जयराम महतो की पार्टी की मौजूदगी ने कई सीटों पर एनडीए की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया. कुर्मी वोटबैंक की लड़ाई में जयराम, सुदेश महतो पर भारी पड़े और कई सीटों पर जेएलकेएम को जीत-हार के अंतर से अधिक वोट मिले.
झारखंड विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की अगुवाई वाले सत्ताधारी इंडिया ब्लॉक ने फिर से सत्ता में वापसी कर ली है. इंडिया ब्लॉक ने पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार आठ सीटें ज्यादा जीती हैं तो वहीं विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को तीन सीटों का नुकसान हुआ है. एनडीए के घटक ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के प्रमुख सुदेश महतो खुद अपनी सीट भी नहीं बचा पाए. इन चुनावों में जयराम महतो की पार्टी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) एक सीट जीत सकी लेकिन कई सीटों पर एनडीए और इंडिया ब्लॉक का खेल खराब कर गई.
कुर्मी वोट की लड़ाई में सुदेश पर भारी पड़े जयराम
आदिवासी बाहुल्य झारखंड की आबादी में करीब 15 फीसदी से अधिक कुर्मी जाति की भागीदारी है. आदिवासी के बाद इस सबसे प्रभावशाली जाति के वोटबैंक पर आजसू और सुदेश महतो का मजबूत प्रभाव था. आजसू के इस वोटबैंक से बीजेपी और एनडीए को बड़ी उम्मीद भी थी. यही वजह है कि एनडीए में सुदेश 81 सीटों वाले झारखंड में बार्गेन कर 10 सीटें लेने में सफल भी रहे थे. सुदेश के सामने कुर्मी पॉलिटिक्स की पिच पर जयराम महतो की चुनौती थी. कुर्मी समुदाय से आने वाले इन दो नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई में इस बार जयराम महतो भारी पड़े.
सुदेश की आजसू को एक सीट पर जीत मिली. आजसू का वोट शेयर 3.54 फीसदी रहा. एक ही सीट पर जयराम की पार्टी भी जीती लेकिन वोट शेयर के लिहाज से जेएलकेएम, आजसू से कहीं आगे रही. जेएलकेएम को 6.12 फीसदी वोट मिले. जयराम महतो की पार्टी दो सीटों पर दूसरे स्थान पर रही. कई सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों को जीत-हार के अंतर से अधिक वोट मिले. चर्चा तो इसे लेकर भी हो रही है कि झारखंड के चुनावी रिंग में अगर जयराम महतो नहीं होते तो चुनाव नतीजे कुछ और भी हो सकते थे.
जयराम ने बिगाड़ा एनडीए का खेल?
सवाल ये भी है कि क्या जयराम के होने से एनडीए का खेल बिगड़ा? दरअसल, जयराम जिस कुर्मी वोटबैंक की राजनीति करते हैं उसे सुदेश महतो की पार्टी का कोर वोटर माना जाता था. सुदेश की पार्टी एनडीए में शामिल है और ऐसा माना जा रहा था कि बीजेपी को उनके साथ गठबंधन का फायदा मिल सकता है. जयराम के चुनावी रिंग में आ जाने से एनडीए में कुर्मी वोटबैंक में सेंध लगी और इसका असर नतीजों पर भी पड़ा.

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