
'जिन मर्दों ने ट्रंप को वोट किया उनसे न शादी करेंगे, न डेट...', अमेरिकी लिबरल महिलाओं का अनोखा आंदोलन
AajTak
सोशल मीडिया पर अमेरिकी महिलाओं के ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें महिलाएं कह रही हैं कि अगले चार साल तक ऐसे पुरुषों से दूरी बनाने जा रही हैं, जिन्होंने ट्रंप को वोट दिया.
अमेरिका में राष्ट्रपति पद पर डोनाल्ड ट्रंप की वापसी से कई महिलाएं खुश नहीं है. यही वजह है कि इन महिलाओं ने दक्षिण कोरिया के एक फेमिनिस्ट मूवमेंट की तर्ज पर ऐसे पुरुषों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है जिन्होंने चुनाव में ट्रंप को वोट दिया. अमेरिका में इसे 4B मूवमेंट का नाम दिया गया है.
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में कई महिलाओं ने ट्रंप को व्हाइट हाउस पहुंचाने वाले पुरुषों के खिलाफ हल्ला बोला है. इस 4B मूवमेंट में शामिल महिलाओं ने ट्रंप को वोट देने वाले वाले पुरुषों का अगले चार साल तक बायकॉट कर दिया है. यानी अगले चार साल में महिलाएं इन पुरुषों को ना तो डेट करेंगे, ना ही शादी करेंगे, ना सेक्स करेंगी और ना ही उनके साथ बच्चे पैदा करेंगी.
इस मूवमेंट के तहत महिलाओं से डेटिंग ऐप भी डिलीट करने को कहा जा रहा है.
क्या था दक्षिण कोरिया का 4B मूवमेंट?
अमेरिका की इन महिलाओं ने 2010 के दशक में दक्षिण कोरिया के 4B मूवमेंट के नक्शेकदम पर चलते हुए पुरुषों का बहिष्कार किया है. कोरियाई भाषा में B का मतलब होता है नहीं. इस तरह 4B दरअसल चार No को दर्शाता है. इन चार No में पुरुषों से डेटिंग, सेक्स, मैरिज और बच्चों पर मनाही है.
सोशल मीडिया पर अमेरिकी महिलाओं के ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें महिलाएं कह रही हैं कि अगले चार साल तक ऐसे पुरुषों से दूरी बनाने जा रही हैं, जिन्होंने ट्रंप को वोट दिया.

अमेरिका ने ईरानी तेल पर 30 दिन की छूट दी, लेकिन ईरान ने एक्स्ट्रा तेल होने से इनकार कर दिया. दोनों के दावों से वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. दुनियाभर के मुल्क ये उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अमेरिकी की ओर से छूट मिलने के बाद ईरान का तेल उन्हें मिलेगा. लेकिन, ईरान के बयान से सभी को बड़ा झटका लगा है.

ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटिश संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान का अबतक का सबसे बड़ा हमला है. वहीं ईरान ने ब्रिटेन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ब्रिटेन अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने देता है तो इसे सीधे आक्रामक कार्रवाई में भागीदार माना जाएगा.

ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान काअबक का सबसे बजड़ा हमला है. डिएगो गारर्सिया बोहद रणनीतिक सैन्य अड्डा है. B-52 बॉम्बर विमान, लंबी दूरी के हमले के हथियार इस बेस पर मौजूद है.

ईरान युद्ध के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग होकर काम कर रहा है. हालांकि यह साफ संकेत मिल रहा है कि दोनों देश अभी भी रणनीतिक रूप से साथ हैं और ‘गुड कॉप-बैड कॉप’ की भूमिका निभा सकते हैं. हाल के घटनाक्रमों ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग चल रहा है या रणनीति का हिस्सा है?

इजरायल ने एक बार फिर ईरान पर हवाई हमला किया है. इजरायल द्वारा ईरान पर लगातार हमले जारी है. इजरायली हमलों से लगातार ईरान में तबाही मची हुई है. ईरान की राजधानी तेहरान इन हमलों से सबसे ज्यादा ग्रसित है, जहां लोग इन हमलों के बीच डर में रहने को मजबूर है. तेहरान के की इलाकों को इस हमले में निशाना बनाया गया.








