
जब ईरान ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान को दिए थे हथियार, पढ़ें- 59 साल पुराना वो किस्सा
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भारत के साथ पाकिस्तान के युद्ध के समय ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने कहा था कि ईरान की किसी तरह की आक्रामक मंशा नहीं है लेकिन पाकिस्तान को तबाह करने के किसी भी प्रयास को वे स्वीकार नहीं करेंगे. भारत को हमारे इन इरादों से वाकिफ होना चाहिए. हम ईरान की सीमा पर नया वियतनाम नहीं चाहते.
ईरान और पाकिस्तान के बीच इस समय तनाव चरम पर है. लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब भारत के खिलाफ बिगुल बजाते हुए ईरान ने पाकिस्तान का खुले दिल से स्वागत किया था.
भारत के साथ पाकिस्तान के युद्ध के समय ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने कहा था कि ईरान की किसी तरह की आक्रामक मंशा नहीं है लेकिन पाकिस्तान को तबाह करने के किसी भी प्रयास को वे स्वीकार नहीं करेंगे. भारत को हमारे इन इरादों से वाकिफ होना चाहिए. हम ईरान की सीमा पर नया वियतनाम नहीं चाहते.
उनका ये बयान स्वाभाविक रूप से भारत की आलोचना को लेकर है. भारत का ऐतिहासिक रूप से ईरान से संबंध हैं और इस तरह के उकसावे को लेकर उनका कोई लेना-देना नहीं है.
जवाहर लाल नेहरू ने अपनी किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया में कहा था कि कुछ लोग अपने अस्तित्व को लेकर इतने करीब रहे हैं. ऐतिहासिक संबंधों के अलावा ईरान के शाह का ये बयान पाकिस्तान के साथ ईरान के करीबी संबंधो को बताने के लिए काफी हैं. ईरान न सिर्फ पाकिस्तान के पाले में है बल्कि 1965 और 1971 के युद्ध में भारत के खिलाफ पाकिस्तान को हथियार भी मुहैया कराए थे. ईरान ने पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई की थी और तेल भी बेचा था.
ईरान और पाकिस्तान का हनीमून पीरियड
ईरान और पाकिस्तान संबंधों की नींव पाकिस्तान के गठन के समय ही पड़ गई थी. ईरान पहला ऐसा देश था, जिसने 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान की संप्रभुता को मान्यता दी थी. दोनों देशों के बीच मई 1950 में एक संधि भी हुई थी.

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