
चिराग, मांझी, ललन सिंह जैसे NDA के सहयोगी दलों के नेताओं को मिले मंत्रालय क्या करते हैं काम?
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एनडीए के सहयोगी LJP (रामविलास) चीफ चिराग पासवान को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, HAM चीफ जीतनराम मांझी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय और JDU के पूर्व चीफ राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को पंचायती राज मंत्रालय और मछलीपालन, पशुपालन, डेयरी मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. TDP नेता के राम मोहन नायडू को नागरिक उड्डयन मंत्रालय और JDS नेता एचडी कुमारस्वामी को इस्पात मंत्रालय और भारी उद्योग मंत्रालय की कमान दी गई है.
एनडीए की नई सरकार गठित होने के बाद मंत्रालयों और विभागों का बंटवारा भी हो गया है. मोदी 2.0 जैसी ही मोदी 3.0 सरकार का स्वरूप देखने को मिला है. कैबिनेट में शामिल किए घटक दलों के नए चेहरों को भी अच्छे खासे बजट वाले विभाग दिए गए हैं. कैबिनेट में कुल 55 मंत्रालयों (स्वतंत्र प्रभार समेत) का बंटवारा किया गया है. इनमें 30 को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. 5 स्वतंत्र प्रभार (राज्य मंत्री) हैं. कई मंत्रियों के दो से तीन विभागों की जिम्मेदारी है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पास कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग और वे सभी महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दे और अन्य सभी विभाग रखे हैं, जो किसी भी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं.
एनडीए के सहयोगी LJP (रामविलास) चीफ चिराग पासवान को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, HAM चीफ जीतनराम मांझी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय और JDU के पूर्व चीफ राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को पंचायती राज मंत्रालय और मछलीपालन, पशुपालन, डेयरी मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. TDP नेता के राम मोहन नायडू को नागरिक उड्डयन मंत्रालय और JDS नेता एचडी कुमारस्वामी को इस्पात मंत्रालय और भारी उद्योग मंत्रालय की कमान दी गई है. आइए जानते हैं कि क्या करते हैं ये मंत्रालय...
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय: खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का देश की अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान है. इसका निर्यात में 13% और औद्योगिक निवेश में 6% का योगदान है. इस क्षेत्र ने पर्याप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित किया है. वर्ष 2014 से 2020 तक 4.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश हुआ है. फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री का तात्पर्य ऐसी एक्टीविटीज से है, जिसमें प्राथमिक कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण कर उनका मूल्यवर्धन किया जाता है. उदाहरण के लिये डेयरी उत्पाद, दूध, फल और सब्जियों का प्रसंस्करण, पैकेट बंद भोजन और पेय पदार्थ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के अंतर्गत आते हैं. भारत बहुत बड़ी मात्रा में विदेशों से खाद्य प्रसंस्कृत उत्पाद आयात करता है. वर्तमान में देश में करीब 370 अरब डॉलर मूल्य के खाद्य पदार्थों की खपत होती है. वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा 1 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंचने की संभावना है. अगर देश में फूड प्रोसेसिंग पर ठीक से काम किया जाए तो हमारी दूसरे देशों से निर्भरता कम होगी और यहां किसान और व्यवसायों से जुड़े लोगों को सीधे इसका लाभ मिलेगा. 2023-2024 में इस मंत्रालय का बजट 3290 करोड़ रुपए था. इस मंत्रालय की जिम्मेदारी चिराग पासवान ने संभाली है.
फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री से क्या लाभ हो सकते हैं?
- फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स के जरिए किसानों को अतिरिक्त मुनाफा कमाने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. कृषि उत्पादकता में बढ़ोतरी होगी, जिससे किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी. - नई आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार के नए अवसर भी मिलते हैं. खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है. कृषि में विविधता को बढ़ावा मिलता है. - यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें व्यापक स्तर पर कारोबारी निवेश की संभावनाएं हैं. देश की संपूर्ण खाद्य मूल्य श्रृंखला में व्यापक अवसर उपलब्ध हैं, इनमें फसल कटाई के बाद सुविधाएं, लॉजिस्टिक्स, कोल्ड स्टोरेज चेन श्रृंखला और विनिर्माण शामिल हैं. - खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का विस्तार किया जाए तो इसमें रोजगार से लेकर व्यापार तक की अपार संभावनाएं हैं. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी खाद्य प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना करके रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं और सूक्ष्म-उद्यमियों के उभरने की संभावनाएं हैं. - खाद्य प्रसंस्करण उद्योग किसानों के लिए भी मददगार साबित हो सकता है. खेती करने के बेहतर तरीके भी बता सकता है और उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल सुलभ हो सकते हैं. किसानों को उनकी उपज के सही दाम मिलने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं. - केंद्र की सरकार मेगा फूड पार्क बनवा रही है. कोल्ड चैन से लेकर एक जिला, एक उत्पाद प्रोडक्ट पर जोर दे रही है. - मेगा फूड पार्क स्कीम का उद्देश्य किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं और खुदरा विक्रेताओं को एक साथ लाते हुए कृषि उत्पादन को बाजार से जोड़ने के लिए एक तंत्र उपलब्ध कराना है ताकि मूल्यवर्धन को अधिकतम, बर्बादी को न्यूनतम, किसानों की आय में वृद्धि और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित करना सुनिश्चित किया जा सके. मेगा फूड पार्क स्कीम 'क्लस्टर' दृष्टिकोण पर आधारित है. - विभाग की प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिये उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना प्रमुख है.

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