
चमोली आपदा का असर अब दिल्ली पर, पानी के लिए लगानी पड़ सकती है लाइन!
AajTak
उत्तराखंड त्रासदी की वजह से दिल्ली को अपर गंगा कैनाल के जरिए भेजे जाने वाले रॉ वॉटर में टर्बिडिटी प्रदूषण काफी ज्यादा बढ़ गया है. इसके मद्देनजर दिल्ली के सोनिया विहार और भागीरथी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में बेहद ही कम क्षमता के साथ पानी ट्रीट हो पा रहा है.
उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने की घटना ने चमोली जिले की सामाजिक, आर्थिक स्थिति को हिलाकर रख दिया है. ऋषि गंगा प्रोजेक्ट पूरी तरह बह गया, NTPC के भी एक पॉवर प्रोजेक्ट को भारी नुकसान हुआ. जनमानस का नुकसान हुआ सो अलग. पर्यटकों में उत्तराखंड को लेकर एक अलग तरह का भय बना हुआ. लेकिन चमोली आपदा का असर सिर्फ उत्तराखंड तक ही सीमित नहीं है बल्कि अब इसका असर दिल्ली पर भी पड़ सकता है. रविवार का दिन दिल्ली वालों के लिए मुश्किल भरा रह सकता है. दरअसल, उत्तराखंड त्रासदी की वजह से दिल्ली को अपर गंगा कैनाल के जरिए भेजे जाने वाले रॉ वॉटर में टर्बिडिटी प्रदूषण काफी ज्यादा बढ़ गया है. इसके मद्देनजर दिल्ली के सोनिया विहार और भागीरथी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में बेहद ही कम क्षमता के साथ पानी ट्रीट हो पा रहा है.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









