
गेहूं निर्यात बैन को सरकार बता रही महंगाई रोकने वाला कदम, किसान क्यों कर रहे विरोध?
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गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने से केंद्र सरकार ने महंगाई को तो काबू में लाने का दावा किया है, लेकिन किसान नाराज हो गए हैं. उन्हें इस फैसले में अपना नुकसान दिख रहा है. वे इसे किसान विरोधी फैसला मान रहे हैं.
केंद्र सरकार की तरफ से गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी गई है. गेहूं के बढ़ते दामों को काबू में लाने के लिए सरकार ने ये फैसला लिया है. तर्क दिया जा रहा है कि इस कदम की वजह से बढ़ती महंगाई से राहत मिल सकती है. गेहूं की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है. लेकिन जिस फैसले का सरकार और कुछ व्यापारी संगठन स्वागत कर रहे हैं, कई किसान उसी फैसले से खुश नहीं हैं.
किसानों को कैसे नुकसान हो रहा?
किसानों की नजरों में गेहूं के निर्यात पर लगाए गए बैन की वजह से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. इसके अलावा क्योंकि सरकार ने अब गेहूं खरीद के नियमों में ढील देने का फैसला किया है, कई किसान इसे भी अपने लिए नुकसान मान रहे हैं. किसानों का मानना है कि गेहूं पर लगाए गए निर्यात बैन की वजह से अब वे कम दामों में अपनी उपज बेचने को मजबूर होंगे, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने खरीद के नियमों में जो ढील दी है, उसका फायदा किसानों से ज्यादा उन निजी प्लेयर्स को होने वाला है जिन्होंने उनसे काफी पहले ही गेहूं खरीद लिया था.
इस बारे में मोहाली के किसान जसप्रीत सिंह बताते हैं कि गेहूं पर लगाए गए निर्यात बैन को तुरंत हटा देना चाहिए. उनकी माने तो सूखे की वजह से पहले ही किसानों ने काफी नुकसान झेला है, अब उन्हें पूरा हक है कि उन्हें अपनी फसल का उचित दाम मिले. किसान नेता रुलदू सिंह मानसा भी सरकार के इस फैसला का विरोध कर रहे हैं. जोर देकर कहा जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से किसानों से ज्यादा निजी प्लेयर्स को फायदा होने वाला है.
सरकार ने फैसला देर से लिया?
वे कहते हैं कि खरीद के नियमों में ढील देना, खरीद अवधि को बढ़ा देना, इन तमाम फैसलों से सिर्फ निजी खिलाड़ियों को फायदा पहुंचने वाला है क्योंकि किसान तो पहले ही उन्हें अपनी फसल बेच चुके हैं. ये बैन लगाने का फैसला भी सरकार ने तब लिया है जब किसानों द्वारा पहले ही ज्यादातर गेहूं निर्यात के लिए भेजा जा चुका है.

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