
गिरफ्तारी वैध, जमानत भी शर्तों पर... बाहर आकर भी केजरीवाल के लिए सरकार चलाने में मुश्किलें कम नहीं! 7 points में समझें
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दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ईडी के बाद सीबीआई मामले में भी जमानत मिल गई है. ईडी ने नवंबर 2023 से मार्च 2024 तक केजरीवाल को 9 समन भेजे, लेकिन वे पूछताछ में शामिल नहीं हुए. उसके बाद ईडी ने 21 मार्च को केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया था. 10 दिन की पूछताछ के बाद 1 अप्रैल को केजरीवाल को तिहाड़ जेल भेजा गया था.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ईडी के बाद सीबीआई मामले में भी सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है. वे आज शाम तक तिहाड़ जेल से बाहर आ सकते हैं. हालांकि, कोर्ट ने सीबीआई की गिरफ्तारी को वैध ठहराया है और बेल की शर्तें तय की हैं. कोर्ट ने जमानत के लिए वहीं शर्तें लगाई हैं, जो ED केस में बेल देते वक्त लगाईं थीं. केजरीवाल को बाहर आकर उन शर्तों का पालन करना होगा. माना जा रहा है कि रिहाई की शर्तों की वजह से केजरीवाल की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं. उन्हें सरकार चलाने में मशक्कत झेलनी पड़ सकती है. फिलहाल, केजरीवाल की रिहाई से पार्टी नेता से लेकर कार्यकर्ता तक खुश हैं. सीएम आवास से लेकर पार्टी दफ्तर तक में जश्न मनाया जा रहा है. सात पॉइंट में जानिए केजरीवाल की रिहाई के मायने.
दरअसल, दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में केजरीवाल भी फंसे हैं. ईडी ने नवंबर 2023 से मार्च 2024 तक केजरीवाल को 9 समन भेजे. लेकिन वे पूछताछ में शामिल नहीं हुए. उसके बाद ईडी ने 21 मार्च को केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया. 10 दिन की पूछताछ के बाद 1 अप्रैल को केजरीवाल को तिहाड़ जेल भेजा गया. इस बीच, 26 जून को सीबीआई ने केजरीवाल को अरेस्ट कर लिया. बाद में 12 जुलाई को ईडी केस में केजरीवाल को जमानत मिल गई, लेकिन सीबीआई की गिरफ्तारी के कारण जेल से रिहाई नहीं हो सकी. आम आदमी पार्टी लगातार दावा कर रही है कि बीजेपी ने केजरीवाल को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया है. वहीं, बीजेपी कह रही है कि बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय.
केजरीवाल को किन शर्तों का करना होगा पालन?
- जेल से बाहर आने के बाद केजरीवाल किसी भी फाइल पर दस्तखत नहीं कर पाएंगे. जब तक ऐसा करना जरूरी ना हो. - केजरीवाल के दफ्तर जाने पर भी पाबंदी रहेगी. वे ना तो मुख्यमंत्री कार्यालय और ना सचिवालय जा सकेंगे. - इस मामले में केजरीवाल कोई बयान या टिप्पणी भी नहीं कर सकते हैं. - किसी भी गवाह से किसी तरह की बातचीत नहीं कर सकते हैं. - इस केस से जुड़ी किसी भी आधिकारिक फाइल को नहीं मंगा सकते हैं. ना देख सकते हैं. - जरूरत पड़ने पर ट्रायल कोर्ट में पेश होंगे और जांच में सहयोग करेंगे. - 10 लाख का बेड बॉन्ड भरना होगा.
1. केजरीवाल के सामने अभी भी मुश्किलें क्यों?
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने केजरीवाल को नियमित जमानत देने का फैसला सुनाया. जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने उनके फैसले पर सहमति जताई. कोर्ट ने केजरीवाल को 10 लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दी है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जवल भुइयां की बेंच ने CBI की गिरफ्तारी को नियमों के तहत बताया. जस्टिस सूर्यकांत का कहना था कि अगर कोई व्यक्ति पहले से हिरासत में है और जांच के सिलसिले में उसे दोबारा अरेस्ट करना गलत नहीं है. कोर्ट ने कहा, CBI ने नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया है. उन्हें जांच की जरूरत थी, इसलिए इस केस में अरेस्ट किया गया. इससे पहले केजरीवाल के वकील ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे और इसे अवैध ठहराया था. कोर्ट के इस निर्णय को केजरीवाल के लिए झटका माना जा रहा है. केजरीवाल अभी भी ट्रायल का हिस्सा रहेंगे और कानूनी दायरे में बने रहेंगे.

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