
खामेनेई के बेटे की ताजपोशी! क्या अमेरिका-इजरायल को ईरान ने आर-पार की जंग का इशारा दे दिया?
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान से एक बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आया है. खबरों के मुताबिक, ईरान ने दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बेटे को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया है. माना जा रहा है कि यह कदम अमेरिका और इजरायल के सामने झुकने से इनकार का संकेत है.
मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग के बीच ईरान से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. ईरान ने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे, मोजतबा खामेनेई को देश का नया 'सुप्रीम लीडर' नियुक्त कर दिया है. यह कदम न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक सीधी चुनौती भी माना जा रहा है. खबरों के मुताबिक, मोजतबा की इस नियुक्ति ने साफ कर दिया है कि ईरान अब अमेरिका और इजरायल के सामने झुकने के मूड में बिल्कुल नहीं है.
ट्रंप की चेतावनी को किया नजरअंदाज
मोजतबा खामेनेई की ताजपोशी ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है. अमेरिकी अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, मोजतबा की नियुक्ति ट्रंप की उस मांग की सीधी अवहेलना है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नया नेता उनकी पसंद का होना चाहिए. ट्रंप ने पिछले हफ्ते ही एक इंटरव्यू में कहा था कि 'खामेनेई का बेटा उन्हें स्वीकार्य नहीं है.' लेकिन ईरान ने ट्रंप की परवाह न करते हुए मोजतबा के हाथों में कमान सौंप दी.
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कौन हैं 56 साल के मोजतबा खामेनेई?
मोजतबा खामेनेई को ईरान के कट्टरपंथी धड़े का बड़ा चेहरा माना जाता है. उनका ईरान की सबसे ताकतवर सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर' (IRGC) के साथ बहुत पुराना और गहरा रिश्ता है. जानकारों का कहना है कि उनकी नियुक्ति से ईरान में कट्टरपंथियों का दबदबा और बढ़ जाएगा. वहीं, चैथम हाउस में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका कार्यक्रम की निदेशक सनम वकिल का मानना है कि मोजतबा का सत्ता में आना ईरान की पुरानी रणनीति को ही आगे बढ़ाएगा, जिसमें देश के अंदर सख्त शासन और बाहर अमेरिका-इजरायल का डटकर मुकाबला करना शामिल है.

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