
खामेनेई के खिलाफ उबल रहा पूरा ईरान... क्या 2026 की शुरुआत में ही छिड़ने वाला है एक और युद्ध?
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ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक दमन के खिलाफ भड़का जनआक्रोश अब देशव्यापी आंदोलन में बदल चुका है. लाखों लोग सड़कों पर उतरकर सत्ता को चुनौती दे रहे हैं. सुरक्षा बलों की सख्ती, ट्रंप की चेतावनी और इजरायल की युद्ध तैयारियों ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है.
ईरान इस वक्त अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है. बीते एक हफ्ते से देशभर में जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे सिर्फ किसी एक शहर या एक तबके के गुस्से की कहानी नहीं हैं, बल्कि यह एक ऐसा जनउभार है, जिसने पूरे ईरान को अपनी चपेट में ले लिया है. सड़कों पर उतर आए लाखों लोग सत्ता के खिलाफ नारे लगा रहे हैं, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को सीधे चुनौती दे रहे हैं और शासन बदलने की मांग कर रहे हैं. तो क्या साल 2026 की शुरुआत में ही एक और युद्ध छिड़ने वाला है?
यह प्रदर्शन अचानक नहीं फूटे हैं. इसके पीछे सालों से जमा होता गुस्सा है, जो अब विस्फोट की तरह बाहर आ रहा है. महंगाई, बेरोजगारी, गिरती मुद्रा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने आम ईरानी की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है. हालात ऐसे हैं कि रोजमर्रा की चीजें लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं. ईरानी करेंसी की कीमत लगातार गिर रही है और जानकार मानते हैं कि यह गिरावट अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है. इसी आर्थिक बदहाली ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है.
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शुरुआत 28 दिसंबर को तेहरान से हुई, जब दुकानदारों और व्यापारियों ने महंगाई और आर्थिक नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया. लेकिन देखते ही देखते यह आंदोलन देशव्यापी बन गया. अब यह सिर्फ व्यापारियों का प्रदर्शन नहीं रह गया है. कॉलेज और यूनिवर्सिटीज के छात्र भी इसमें शामिल हो चुके हैं. खासकर जेन-Z, जो रोजगार के संकट से जूझ रही है, इस आंदोलन की बड़ी ताकत बनकर उभरी है. युवाओं को लगता है कि मौजूदा व्यवस्था उनके भविष्य को अंधेरे में धकेल रही है.
ईरान में बड़े पैमाने पर हो रही हिंसाएं
इन प्रदर्शनों की एक बड़ी खासियत महिलाओं की बढ़ती भागीदारी है. सख्त सामाजिक पाबंदियों और कट्टर नियमों वाले ईरान में महिलाओं का इस तरह सड़कों पर उतरना सत्ता के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. यही वजह है कि सरकार और सुरक्षा बलों ने आंदोलन को कुचलने के लिए सख्ती का रास्ता अपनाया. लाठीचार्ज, गोलीबारी, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और हिरासत अब आम बात हो चुकी है. आगजनी की घटनाएं बढ़ रही हैं, गाड़ियां और इमारतें जल रही हैं और हिंसा में अब तक कम से कम 19 लोगों की मौत की खबर सामने आ चुकी है.

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