
क्रीमिया ब्रिज पर लगाए 1100 किलो अंडरवाटर विस्फोटक, ट्रिगर दबाते ही धमाका... यूक्रेन ने रूस को फिर ललकारा
AajTak
यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) ने 13 किलोमीटर लंबे क्रीमियन ब्रिज पर तीसरी बार एक 'स्पेशल ऑपरेशन' किया है. इस बार विस्फोट अंडरवाटर सपोर्ट्स पर हुआ, जिससे पुल को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया जा रहा है. यह कार्रवाई मास्को की युद्ध मशीनरी को सीमित करने और क्रीमिया के साथ रूस के जुड़ाव को कमजोर करने की कोशिश का हिस्सा है.
यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) ने मंगलवार को एक अनोखी और बड़े ऑपरेशन के तहत क्रीमियन ब्रिज पर तीसरी बार हमला किया है. इस बार उन्होंने पुल के जलमग्न आधार यानी अंडरवॉटर सपोर्ट्स पर विस्फोटक लगाकर विस्फोट किया, जिससे पुल को गंभीर नुकसान पहुंचाने का दावा किया जा रहा है. SBU के ने बताया कि इस ऑपरेशन में 1,100 किलोग्राम TNT विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया है.
लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार सुबह 4:44 बजे विस्फोट हुआ. SBU ने बताया कि इस खास ऑपरेशन में उन्होंने महीनों की मेहनत लगाई. यह हमला क्रीमियन ब्रिज के जलमग्न पोल को निशाना बनाकर पुल के आधार को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा था.
यह भी पढ़ें: आखिर यूक्रेन के पास कितनी आर्मी है? जो 3 साल से रूस जैसी महाशक्ति से लड़ रहा है
केर्च ब्रिज के नाम से मशहूर है क्रीमिया ब्रिज
क्रीमियन ब्रिज, जिसे केर्च ब्रिज भी कहा जाता है, रूस और क्रीमिया को जोड़ने वाला एक अहम रोड एंड रेल ब्रिज है. यह 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया के कब्जे के बाद बनाया गया था और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक अहम प्रोजेक्ट माना जाता है. यह ब्रिज रूस के लिए कई मायनो में अहम है. युद्ध के दौरान भी इस ब्रिज के जरिए रूस ने भारी मात्रा में हथियार और सेना यूक्रेन में सप्लाई किया है.
यूक्रेन ने पहले दो बार ब्रिज को बनाया निशाना

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा. कई टॉप कमांडर्स के मारे जाने के बाद भी ईरान, अमेरिका और इजरायल पर जबरदस्त पलटवार कर रहा है. ट्रंप की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. ना तो ईरान के तेवर कमजोर पड़ रहे और ना ही NATO और दुनिया के तमाम देश ट्रंप का साथ दे रहे. सवाल है क्या ईरान को हराना ट्रंप के लिए 'नाक की लड़ाई' बन गई है? देखें हल्ला बोल.

ईरान ने भी अपनी मिसाइल ताकत को दुनिया के सामने पेश किया है और ईरान ने हिंद महासागर में मौजूद ब्रिटेन के सैन्य बेस पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर दो लॉन्ग रेंज मिसाइलों से हमला किया है. हम आपको बता दें कि ईरान से दिएगो गार्सिया की दूरी करीब 4 हजार किलोमीटर है. ईरान ने दिएगो गार्सिया की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जिसमे एक को बीच में ही नष्ट करने का दावा किया जा रहा है.

अमेरिका ने ईरानी तेल पर 30 दिन की छूट दी, लेकिन ईरान ने एक्स्ट्रा तेल होने से इनकार कर दिया. दोनों के दावों से वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. दुनियाभर के मुल्क ये उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अमेरिकी की ओर से छूट मिलने के बाद ईरान का तेल उन्हें मिलेगा. लेकिन, ईरान के बयान से सभी को बड़ा झटका लगा है.

ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटिश संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान का अबतक का सबसे बड़ा हमला है. वहीं ईरान ने ब्रिटेन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ब्रिटेन अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने देता है तो इसे सीधे आक्रामक कार्रवाई में भागीदार माना जाएगा.









