
क्या बृजभूषण के गढ़ में बना नंदिनी नगर स्टेडियम है विवाद की असली जड़? कुश्ती संघ के घमासान की Inside Story
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खेल मंत्रालय ने भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के हाल ही में हुए चुनाव को रद्द कर दिया और मंत्रालय ने नवनियुक्त अध्यक्ष संजय सिंह को भी सस्पेंड कर दिया. इस फैसले की असली जड़ 28 तारीख़ से होने वाले जूनियर नेशनल कुश्ती टूर्नामेंट रहा जिसे नए फेडरेशन ने नंदिनी नगर, गोंडा में करवाने का फ़ैसला लिया.
रविवार को खेल मंत्रालय ने बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय कुश्ती संघ की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी और अध्यक्ष संजय सिंह को निलंबित कर दिया. इसके बाद खेल मंत्रालय ने इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA)को लेकर एक नई एड हॉक कमेटी बनाने को कहा जो तीन तीनों के अंदर बनेगी. इस कमेटी का काम WFI की हर दिन की गतिविधियों पर ध्यान रखना रहेगा.
इसके लिए खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने खुद आईओए प्रमुख को पत्र लिखकर कहा कि अस्थायी पैनल, एथलीटों के सेलेक्शन सहित डब्ल्यूएफआई के मामलों का प्रबंधन और नियंत्रण करेगा. एडहॉक कमेटी का मुख्य काम खास सलाह और सुझाव देना है. एडहॉक कमेटी में अलग-अलग पृष्ठभूमि और विषयों के लोग शामिल हो सकते हैं. सरकार के इस सख्त फैसले के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. तो आइए जानते हैं इस विवाद की वो वजहें, जिसके कारण से कुश्ती महासंघ की नई कार्यकारिणी भंग हुई.
नंदिनी नगर बना विवाद की अहम जड़
कुश्ती महासंघ के चुनाव जीतने के कुछ घंटे बाद बाद ही नए अध्यक्ष संजय सिंह ने गोंडा स्थित नंदिनी नगर में अंडर-15 और अंडर-20 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन का ऐलान कर दिया. जो बृजभूषण सिंह का गृह क्षेत्र है. इस फैसले के बादर विवाद शुरू हो गया था. खुद साक्षी मलिक ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, 'गोंडा बृजभूषण का इलाका है. अब आप सोचिए कि जूनियर महिला पहलवान किस माहौल में कुश्ती लड़ने वहां जाएंगी. क्या इस देश में नंदिनी नगर के अलावा कहीं पर भी नेशनल करवाने की जगह नहीं है? समझ नहीं आ रहा कि क्या करूं.'
नंदिनी नगर में टूर्नामेंट कराने को लेकर बृजभूषण सिंह ने कहा कि समय कम था तो सभी फेडरेशनों ने टूर्नामेंट कराने से हाथ खड़े कर दिए इसलिए उन्होंने नंदिनी नगर में टूर्नामेंट कराने का फैसला लिया. उन्होंने कहा कि नंदिनी नगर में कुश्ती के लिए सभी तरह की मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं.
नंदिनी नगर को लेकर ना केवल खिलाड़ियों ने सवाल उठाए बल्कि खेल प्रेमियों को भी इससे आश्चर्य हुआ. बस यही फैसला नई कार्यकारिणी को भारी पड़ा और लोगों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए सरकार ने अहम फैसला लिया और कार्यकारणी को ही भंग कर दिया.

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