
क्या उद्धव और राज ठाकरे की मराठी पॉलिटिक्स की काट है उज्जवल निकम की राज्यसभा में एंट्री?
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महाराष्ट्र में बीएमसी और स्थानीय निकाय चुनाव करीब हैं. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की पार्टियां मराठी पॉलिटिक्स की पिच पर आक्रामक हैं. ऐसे में चर्चित वकील उज्ज्वल निकम की राज्यसभा में एंट्री क्या मराठी पॉलिटिक्स की काट है?
महाराष्ट्र में भाषा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. मराठी और अंग्रेजी के साथ एक से पांचवीं कक्षा तक तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को अनिवार्य करने के महाराष्ट्र सरकार के आदेश के खिलाफ उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने आंदोलन का ऐलान किया था. महाराष्ट्र सरकार ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का आदेश वापस ले लिया, लेकिन यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा.
महाराष्ट्र में जल्द ही बीएमसी और अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव होने हैं और सत्ताधारी महायुति की अगुवाई कर रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मराठी अस्मिता की सियासी पिच पर घिरी नजर आ रही है. महाराष्ट्र में जारी भाषा विवाद के बीच राज्यसभा में चार सदस्य मनोनीत किए गए.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जिन चार सदस्यों को उच्च सदन के लिए मनोनीत किया है, उनमें एक नाम चर्चित सरकारी वकील उज्ज्वल निकम का भी है. उज्ज्वल निकम के राज्यसभा सदस्य मनोनीत होने के बाद अब बात इसे लेकर भी हो रही है कि क्या उनका मनोनयन उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की मराठी पॉलिटिक्स की काट है?
मराठी पॉलिटिक्स की चर्चा क्यों
उज्ज्वल निकम एक मराठी परिवार से आते हैं. निकम का जन्म जलगांव के एक संभ्रांत मराठी परिवार में हुआ था और उनके पिता न्यायिक सेवा में जज थे. उज्ज्वल निकम को पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने टिकट दिया था. हालांकि, कोर्ट रूम में अजेय निकम सियासत में अपना डेब्यू मैच हार गए थे. बीजेपी संदेश, संकेत और प्रतीकों की सियासत में दक्ष मानी जाती है और मराठी विवाद के बीच अब मराठा उज्ज्वल निकम का देश के उच्च सदन में मनोनयन भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
क्या कहते हैं जानकार

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