
कौन हो सकता है अगला भारत रत्न? ये हैं 5 दावेदार...
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वैसे तो भारत रत्न दिए जाने के बहुत से आधार हैं. पर जिन आधार पर चुनावी साल में 5 भारत रत्न दिए गए हैं उन्हें अगर फार्मूला माना जाए तो कम से कम 5 नाम और निकल कर आ रहे हैं. जिन्हें भविष्य में भारत रत्न मिले तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए.
2024 के इस चुनावी मौसम में धड़ाधड़ भारत रत्न बांटे जा रहे हैं. और ऐसे लोगों को मिल रहे हैं जिन लोगों के बारे में खुद बीजेपी के नेताओं को भी यकीन नहीं था कि उन्हें उनकी पार्टी कभी भारत रत्न दे सकती है. जाहिर है हर नाम के पीछे राजनीतिक लाभ होने की बात कही जा रही है. फिलहाल यह कोई नया ट्रेंड नहीं है. जिसकी सरकार बनी उसने अपने हिसाब से भारत रत्न को अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया. कांग्रेस ने एमजी रामचंद्रन को भारत रत्न दिया, विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार बनी तो डॉक्टर भीमराव आंबेडकर को मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया. गैर कांग्रेसी सरकारें बनीं तो मोरारजी देसाई, वल्लभभाई पटेल और जयप्रकाश नारायण जैसी शख्सियतों को भी भारत रत्न मिला.
लोकतंत्र में सभी सरकारें एक ही लीक पर चलती हैं. अपने कोर वोटर्स और पार्टी की नीतियों को ध्यान में रखकर हमेशा फैसले होते रहे हैं. पिछले 15 दिनों के भीतर लालकृष्ण आडवाणी, कर्पूरी ठाकुर, पी वी नरसिम्हा राव, चौधरी चरण सिंह और एस स्वामीनाथन को भी भारत रत्न देने के फैसले में कहीं न कहीं अपने राजनीतिक हित ही छिपे हैं. जिन आधार पर ये पांच पुरस्कार दिए गए हैं अगर हम उन्हें गणितीय सूत्र माने तो 5 और नाम दिखाई दे रहे हैं. जिन्हें मौका मिलते ही भारत सरकार भारत रत्न दे सकती है. इन नामों का आधार कोई पॉलिकल सोर्स नहीं है बस समय-काल और परिस्थितियों के आधार पर इनका नाम निकाला गया है.
1-कांशीराम: उत्तर भारत में दलित राजनीति के बड़े नायक
उत्तर भारत में दलित राजनीति के मसीहा मास्टर कांशीराम को भारत रत्न दिए जाने की मांग उत्तर प्रदेश और बिहार के नेता समय समय पर करते रहे हैं. चौधरी चरण सिंह, नरसिम्हा राव और स्वामीनाथन के नाम की घोषणा होने के बाद बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने तुरंत ट्वीट करके मास्टर कांशीराम के लिए भारत रत्न की मांग कर दी है. उधर बिहार में तेजस्वी यादव भी लगातार कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग करते रहे हैं. बीजेपी के लिए भी दलित वोटों में घुसपैठ बनाने के लिए कांशीराम को भारत रत्न देना हितकर ही हो सकता है. क्योंकि बहुत कोशिश के बाद भी दलित वोटों में जिस तरह की पैठ पार्टी की होनी चाहिए वैसी नहीं हो पा रही है.
उत्तर भारत के राज्यों में मायावती अभी दलित वोटों की सबसे बड़ी ठेकेदार बनी हुई हैं. कांग्रेस -समाजवादी पार्टी भी लगातार दलित वोटों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. चूंकि मायावती की राजनीति अब ढलान पर है इसलिए सही मौका है. आज तक के मूड ऑफ द नेशन के अनुसार 2024 के लोकसभा चुनावों में बीएसपी को एक भी सीट मिलती नहीं दिख रही है. विधानसभा चुनावों में भी मात्र एक प्रत्याशी ही बीएसपी का चुनाव जीत सका था. 2014 में भी बीएसपी को लोकसभा की एक भी सीट यूपी में नहीं मिली थी. मायावती को मिलने वाला वोट प्रतिशत भी लगातार गिर रहा है. इस तरह यह कन्फर्म है कि मायावती का वोट बैंक बहुत तेजी से ट्रांसफर हो रहा है. यह सही मौका है दलित वोटों को अपना बनाने का. बीजेपी को भी मिशन 370 सीट के लिए दलित वोटों का सहारा चाहिए. इसलिए इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह दिन दूर नहीं है जब केंद्र सरकार की ओर कांशीराम के लिए भी भारत रत्न की घोषणा हो जाए.
2-बाल ठाकरे: महाराष्ट्र और देशभर में हिंदुत्व के बड़े नायक

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