
कौन हैं चेचेन कमांडर Ramzan Kadyrov, जो रूस की ओर से नाबालिग बेटों को लड़ने यूक्रेन भेज रहे
AajTak
चेचन्या के कमांडर रमजान कादिरोव ने अपनी तीन नाबालिग बेटों को रूस की ओर से यूक्रेन युद्ध पर भेजने का ऐलान किया है. उनके बेटों अखमत (16), अली (15) और एडम (14) ने काफी पहले ही सैन्य प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था. उनका बकायदा पोस्ट कर कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए उम्र आड़े नहीं आनी चाहिए.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के वफादार और चेचन्या के नेता रमजान कादिरोव (Ramzan Kadyrov) ने अपने एक बयान से सभी को चौंका दिया है. उन्होंने कहा है कि वह यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में अपने तीनों नाबालिग बेटों को रूस की तरफ से मोर्चे पर भेज रहे हैं. उन्होंने सोमवार को टेलीग्राम पोस्ट कर इस जानकारी दी. उन्होंने पोस्ट में कहा कि हमारी मातृभूमि की रक्षा के लिए उम्र आड़े नहीं आनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि उनके बेटों अखमत (16), अली (15) और एडम (14) ने काफी पहले ही सैन्य प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था. कादिरोव कहते हैं कि मेरा हमेशा से मानना है कि किसी भी पिता का मुख्य उद्देश्य अपने बच्चों में धर्म को लेकर जुनूनी बनाना और परिवार, अपने लोगों और देश की रक्षा करना सीखाना है. अगर आप शांति चाहते हैं तो युद्ध के लिए तैयार रहें. अखमत, अली और एडम अपने कौशल का इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं. और मैं मजाक नहीं कर रहा हूं.
कादिरोव ने कहा कि अब समय आ गया है कि वे असल युद्ध में खुद को साबित करें और ये उनकी इच्छा है, जिसका मैं स्वागत करता हूं. वे जल्द ही युद्ध के मोर्चे पर जाएंगे और वो भी सबसे चुनौतिपूर्ण मोर्चे पर.
कादिरोव के बयान की हो रही निंदा
कादिरोव के इस ऐलान की यूक्रेन सहित दुनियाभर में निंदा भी हो रही है. इसके बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि अब रूस युद्ध में नाबालिगों को शामिल करना शुरू कर रहा है, जो कि अनैतिक है.
बता दें कि युद्ध में 18 साल से कम उम्र के लोग प्रत्यक्ष तौर पर हिस्सा नहीं ले सकते. इस संबंध में रूस ने संयुक्त राष्ट्र संधि पर हस्ताक्षर किया है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि ईरान ने उन पर हमला किया या उनकी हत्या की साज़िश रची, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह से दुनिया के नक्शे से मिटा देगा. यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है. ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. ऐसे हालात में दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता अभी भी कायम है. दावोस में दिए अपने भाषण में उन्होंने डेनमार्क को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह एहसानफरामोश निकला, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को दिया था, लेकिन अब डेनमार्क इसका सही उपयोग नहीं कर रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और वह इसे लेना चाहते हैं.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.









