
कैसा है दुनिया का सबसे बड़ा रिफ्यूजी कैंप, वहां ऐसा क्या हुआ जो शरण देने वाले देश पर ही लगने लगे आरोप?
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चक्रवाती तूफान मोका कहर बरपाने के बाद लगभग शांत पड़ चुका. करीब 200 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आए इस तूफान के बीच तटीय बांग्लादेशी शहर कॉक्स बाजार की खूब चर्चा हुई. ये दुनिया का सबसे बड़ा रिफ्यूजी कैंप है, जहां बांग्लादेश ने लाखों रोहिंग्या शरणार्थियों को बसा तो दिया, लेकिन कई विवादों के बाद उन्हें जबर्दस्ती एक सूने द्वीप पर भेजने लगी. इससे फसाद और बढ़ गया.
यूनाइटेड नेशन्स रिफ्यूजी एजेंसी UNHCR ने साल 2021 में बांग्लादेश में बसे रोहिंग्या मुस्लिमों की हालत पर सवाल उठाते हुए उनकी तुलना कैदियों से कर दी. यूएन का आरोप है कि 10 लाख से ज्यादा रिफ्यूजी वहां लगातार खतरों के बीच रह रहे हैं. ये आरोप पहली बार नहीं लगा. म्यांमार से भागकर बांग्लादेश पहुंचे रोहिंग्याओं को वहां की सरकार ने कॉक्स बाजार में बसा तो दिया, लेकिन वहां की आबादी लगातार बढ़ती गई. यहां तक कि मानव तस्करी और ड्रग्स जैसे मामले आने लगे.
कौन हैं रोहिंग्या और क्यों भागे म्यांमार से ये सुन्नी मुस्लिम हैं, जो म्यांमार के रखाइन प्रांत में रहते आए थे. बौद्ध आबादी वाले म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिम माइनॉरिटी में हैं. इनकी आबादी 10 लाख से कुछ ज्यादा बताई जाती रही. लगातार सैन्य शासन के बाद थोड़े स्थिर हुए इस देश में जनगणना के दौरान रोहिंग्याओं को शामिल नहीं किया गया. कहा गया कि वे बांग्लादेश से यहां जबरन चले आए और उन्हें लौट जाना चाहिए.
इस घटना के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा
बौद्ध आबादी के बीच मुस्लिमों को लेकर गुस्सा तब और भड़का जब रोहिंग्याओं ने एक युवा बौद्ध महिला की बलात्कार के बाद हत्या कर दी. इसके बाद से सांप्रदायिक हिंसा शुरू हुई और रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार से खदेड़े जाने लगे. साल 2017 में नरसंहार के बीच बड़ी संख्या में ये लोग भागकर बांग्लादेश पहुंच गए.
मदद के आश्वासन पर दिया ठिकाना
इसी साल पूरे 7 वर्ष हो जाएंगे, जब लाखों रोहिंग्या मुस्लिम जान बचाने के लिए पड़ोसी देश बांग्लादेश आए. बांग्लादेश खुद आर्थिक तौर पर काफी मजबूत नहीं है, लेकिन मानवीय आधार पर वो शरणार्थियों को अपने यहां बसाने के लिए तैयार हो गया. इसमें बड़ा हाथ यूएन का भी था. उसने और कई दूसरी इंटरनेशनल संस्थाओं ने बांग्लादेश को काफी मदद देने का वादा किया.

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