
'किसी को बॉबी कटारिया ने फंसाया, किसी को ट्रेनिंग देकर बनाया फर्जी CBI अफसर', कंबोडिया में ऐसे चल रही थी साइबर क्राइम 'इंडस्ट्री'
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ईडी की जांच से पता चला है कि किस तरह भारतीय नागरिकों को विदेशों में, विशेष रूप से सिंगापुर और दुबई जैसे देशों में आकर्षक नौकरियों के वादे के जरिए लुभाया गया और फिर उन्हें डिजिटल स्कैम के धंधे में शामिल कर लिया गया. ऐसे ही एक पीड़ित, उत्तर प्रदेश के हापुड़ निवासी 36 वर्षीय मनीष तोमर ने जांचकर्ताओं को बताया कि इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर बॉबी कटारिया ने उनसे संपर्क किया था.
साइबर क्राइम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई में एक बड़े पैमाने पर मानव तस्करी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. इस गिरोह में कुछ भारतीय अपराधी भी शामिल हैं, जबकि कुछ पीड़ित नागरिक भी हैं जो साइबर फ्रॉड के शिकार हुए हैं.
कंबोडिया में 3,000 से अधिक व्यक्तियों की गिरफ्तारी के बाद- जिनमें 105 भारतीय और 81 पाकिस्तानी शामिल हैं- ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के नेतृत्व में भारतीय अधिकारियों ने सीमा पार डिजिटल क्राइम रैकेट की व्यापक जांच शुरू की है.
ईडी दस्तावेजों के अनुसार, साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट के कई मामलों की जड़ें दक्षिण पूर्व एशिया- विशेष रूप से कंबोडिया और लाओस- से संचालित स्कैम सेंटर्स में हैं और कुख्यात गोल्डन ट्रायंगल रीजन से जुड़ी हुई हैं, जो अवैध तस्करी का एक पुराना केंद्र है.
नौकरियों का लालच देकर घोटालों में फंसाया
ईडी की जांच से पता चला है कि किस तरह भारतीय नागरिकों को विदेशों में, विशेष रूप से सिंगापुर और दुबई जैसे देशों में आकर्षक नौकरियों के वादे के जरिए लुभाया गया और फिर उन्हें डिजिटल स्कैम के धंधे में शामिल कर लिया गया. ऐसे ही एक पीड़ित, उत्तर प्रदेश के हापुड़ निवासी 36 वर्षीय मनीष तोमर ने जांचकर्ताओं को बताया कि इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर बॉबी कटारिया ने उनसे संपर्क किया था, जिन्होंने उन्हें सिंगापुर में दो साल के वर्क परमिट की पेशकश की थी. तोमर ने कंसल्टेशन फी के रूप में 50,000 रुपये का भुगतान किया, लेकिन इसके बदले उन्हें टूरिस्ट वीजा पर लाओस भेज दिया गया.
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