
कांवड़ यात्रा के चलते गाजियाबाद में ट्रैफिक डायवर्जन... ट्रक-बसों को No Entry, छोटे वाहनों के लिए भी कई रूट डायवर्ट
AajTak
गाजियाबाद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कांवड़ियों की संख्या और मौजूदा स्थिति को देखते हुए किसी भी समय ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है. यदि आवश्यकता पड़ी तो दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को वैकल्पिक मार्ग के रूप में खोला जा सकता है. साथ ही, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले वाहनों को प्रशासनिक अनुमति के आधार पर कुछ छूट दी जा सकती है.
सावन माह की शुरुआत के साथ ही शिवभक्तों की आस्था का सैलाब सड़कों पर उमड़ पड़ा है. हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर हजारों कांवड़िए गाजियाबाद के रास्ते दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं. श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करने के लिए गाजियाबाद पुलिस और ट्रैफिक विभाग ने व्यापक ट्रैफिक प्लान लागू किया है.
गाजियाबाद ट्रैफिक पुलिस ने 11 जुलाई रात 10 बजे से 25 जुलाई तक भारी वाहनों जैसे ट्रक, ट्रॉला, रोडवेज और प्राइवेट बसों तथा ट्रैक्टर-ट्रॉली की शहर की सीमाओं में एंट्री पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दी है.
दिल्ली की ओर से आने वाले वाहनों पर रोक
जो भारी वाहन दिल्ली की ओर से लोनी बॉर्डर, तुलसी निकेतन, सीमापुरी और आनंद विहार से गाजियाबाद में घुसने की कोशिश करेंगे, उन्हें सीमा पर ही रोक दिया जाएगा. हरिद्वार, मुरादाबाद, अमरोहा, लखनऊ जैसे स्थानों की ओर जाने वाले ट्रकों को रोड नंबर 56 यानी चौधरी चरण सिंह मार्ग होते हुए यूपी गेट (गाजीपुर बॉर्डर) से होकर एनएच-09 पकड़ना होगा और फिर डासना इंटरसेक्शन से ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे के जरिए आगे बढ़ना होगा.
बागपत, लोनी और ट्रोनिका सिटी मार्गों पर भी नो एंट्री
बागपत की तरफ से दिल्ली जाने वाले भारी वाहन ट्रोनिका सिटी और सोनिया विहार होकर ही निकलेंगे. लोनी बॉर्डर से लोनी कस्बे की ओर भी भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है.

सरकार ने राज्यसभा में बताया कि निजाम के 173 बहुमूल्य गहने 1995 से भारतीय रिजर्व बैंक के वॉल्ट में कड़ी सुरक्षा में रखे गए हैं. संस्कृति मंत्रालय ने इनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और विरासत महत्व को स्वीकार किया है. केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इन गहनों को हैदराबाद में स्थायी सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए स्थानांतरित करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है.

Delhi Weather: दिल्ली में फरवरी की शुरुआत मौसम में बदलाव के साथ होगी. जिसमें हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने को मिलेगा. IMD के अनुसार, 31 जनवरी से 3 फरवरी तक न्यूनतम तापमान 6-8 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 19-21 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा. जनवरी में असामान्य बारिश के बाद फरवरी की शुरुआत भी ठंडी और गीली रहने की संभावना है.

जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश तक पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो रही है और दृश्य अत्यंत सुंदर हैं. इस बर्फबारी के कारण कई पर्यटक इन जगहों की ओर जा रहे हैं. रास्तों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन गई है क्योंकि कई मार्ग बंद हो गए हैं. श्रीनगर में सुबह से लगातार बर्फबारी हो रही है जिससे मौसम में बदलाव आया है और तापमान गिरा है. पुलवामा, कुलगाम, शोपियां, गुरेज सहित अन्य क्षेत्र भी इस मौसम से प्रभावित हैं.

अमेरिका का ट्रंप प्रशासन इस महीने ‘ट्रंपआरएक्स’ नाम की एक सरकारी वेबसाइट लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके जरिए मरीज दवा कंपनियों से सीधे रियायती दरों पर दवाएं खरीद सकेंगे. सरकार का दावा है कि इससे लोगों का दवा खर्च कम होगा. हालांकि इस योजना को लेकर डेमोक्रेट सांसदों ने गलत तरीके से दवाएं लिखे जाने, हितों के टकराव और इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं.

आज सबसे पहले दस्तक देने जा रहे हैं, पंजाब में ध्वस्त होते लॉ एंड ऑर्डर पर, पंजाब में बढ़ते, गैंग्स्टर्स, गैंगवॉर और गन कल्चर पर. जी हां पंजाब में इस वक्त एक दर्जन से ज़्यादा गैंग्स सरेआम कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं, कानून के रखवालों के दफ्तरों के सामने हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं, और तो और बिना डरे, पंजाब पुलिस, पंजाब सरकार को, पंजाब के नेताओं, मंत्रियों, उनके बच्चों, उनके रिश्तेदारों को धमकियां दे रहे हैं. देखें दस्तक.

देहरादून के विकासनगर इलाके में दुकानदार द्वारा दो कश्मीरी भाइयों पर हमला करने का मामला सामने आया है. खरीदारी को लेकर हुए विवाद के बाद दुकानदार ने मारपीट की, जिसमें 17 साल के नाबालिग के सिर में चोट आई. दोनों भाइयों की हालत स्थिर बताई जा रही है. पुलिस ने आरोपी दुकानदार संजय यादव को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है.

जिस मुद्दे पर नियम बनाकर UGC ने चुप्पी साध ली, राजनीतिक दल सन्नाटे में चले गए, नेताओं ने मौन धारण कर लिया.... रैली, भाषण, संबोधनों और मीडिया बाइट्स में सधे हुए और बंधे हुए शब्द बोले जाने लगे या मुंह पर उंगली रख ली गई. आखिरकार उन UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल पूछते हुए इन्हें भेदभावपूर्ण और अस्पष्ट मानते हुए इन नियमों पर अस्थाई रोक लगा दी. आज हमारा सवाल ये है कि क्या इन नियमों में जो बात सुप्रीम कोर्ट को नजर आई... क्या वो जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को दिखाई नहीं दी?






