
कभी बाहरियों के लिए कसकर बंद थे दरवाजे, अब क्यों जापान अपने शहरों को अफ्रीकी युवाओं का होमटाउन बना रहा?
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जापान अपने चार शहरों को अफ्रीकी लोगों का होमटाउन बनाने जा रहा है. यानी इन शहरों में चुने हुए अफ्रीकी देशों तंजानिया, नाइजीरिया, घाना और मोजाम्बिक के लोग बस सकेंगे. अब तक जापान अपनी बेहद, या यूं कहें कि सबसे सख्त प्रवासी नीतियों के लिए जाना जाता रहा. फिर क्या वजह है, जो वो गरीब मुल्कों से लोगों को बुला रहा है?
जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) ने हाल में एलान किया कि वो देश के चार शहरों को चुनिंदा अफ्रीकी लोगों का होमटाउन बना देगा. यहां अफ्रीकी आबादी न केवल बस सकेगी, बल्कि उसे अपना घर मान सकेगी. ये तब है जबकि जापान वीजा देने के मामले में दुनिया के सबसे सख्त देशों में गिना जाता रहा. इस एशियाई देशों में लंबी पड़ताल के बाद भी कम ही लोगों को एंट्री मिलती रही. यहां तक कि अपनी भाषा को लेकर भी जापान में एक किस्म की जिद रही. फिर क्यों ये देश एकाएक अफ्रीका को लेकर उदार हो रहा है?
जापान की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है. वहीं अफ्रीका में सबसे ज्यादा युवा हैं. जापान अमीर है, जबकि अफ्रीका इकनॉमिक स्तर पर स्ट्रगल कर रहा है. दोनों की जरूरतें मिल-जुलकर पूरी हो सकती हैं. यही हो रहा है. अब तक अपनी सीमाओं को लगभग बंद रखता आया जापान अब अपने यहां अफ्रीकी आबादी को जगह दे रहा है.
आंकड़े भी जापान की हालत को बताते हैं. साल 2024 में यहां जन्म की तुलना में एक मिलियन से ज्यादा मौतें हुईं. टोक्यो सरकार इसे साइलेंट इमरजेंसी मान चुकी.
क्या देश में अपने स्तर पर कोई कोशिश नहीं हुई
यहां बर्थ रेट बढ़ाने पर जोर दिया गया. महिलाओं पर से काम का बोझ कम किया गया. यहां तक कि जन्म पर इंसेंटिव और लंबी छुट्टियों का वादा भी हुआ, लेकिन बेकार. जापान में बर्थ रेट का ग्राफ नीचे ही रहा. अब डेमोग्राफी सुधारने के लिए वहां नया तरीका निकाला गया. टोक्यो चार अफ्रीकी देशों से अपने यहां युवा जोड़े लेकर आएगा और उन्हें चार अलग-अलग शहरों में बसाएगा.
कहां, किसे बसाने का प्लान

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