
कनाडा सरकार का भारतीय मीडिया पर आरोप, कहा- हमारे खिलाफ खबर दिखाने में विदेशी ताकतों का हाथ, मिला ये जवाब
AajTak
कनाडा सरकार ने कई भारतीय मीडिया हाउस पर 'सूचना का हेरफेर' करने का आरोप लगाया है. दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध खराब हो चुके हैं. मालूम हो कि कनाडा सरकार ने भारतीय मीडिया चैनल के खिलाफ आरोप लगाया है.
कनाडा सरकार ने कई भारतीय मीडिया हाउस पर 'सूचना का हेरफेर' करने का आरोप लगाया है. दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध खराब हो चुके हैं. इस बीच एक कनाडाई आयोग ने इंडिया टुडे के 5 लाइव खबरों का विश्लेषण किया है, जिसे वरिष्ठ कार्यकारी संपादक शिव अरूर ने होस्ट किया था. यह 13 सितंबर को प्रसारित हुआ था.
पिछले साल होस्ट किए गए अपने शो पर लगे आरोप पर जवाब देते हुए शिव अरूर ने कहा कि कनाडा में वास्तविक विदेशी हस्तक्षेप चीन की ओर से चुनावों में हस्तक्षेप, साइबर हैकिंग, जासूसी के आरोपों से आता है, फिर भी वे एक भारतीय टीवी शो को निशाना बना रहे हैं.
वरिष्ठ संपादक ने कहा, 'चुनावी रणनीति से निपटना जटिल है, आर्थिक दबाव की रणनीति से निपटना महंगा है और साइबर जासूसी से निपटने के लिए पैसे और प्रयास की जरूरत होती है. लेकिन दूसरे देश में बैठकर एक टेलीविजन के प्रोग्राम की पहचान करना और इसे विदेशी हस्तक्षेप बताना आसान है.
एक दर्जन से अधिक समाचार कंटेंट का जिक्र मालूम हो कि कनाडा सरकार ने भारतीय मीडिया चैनल के खिलाफ आरोप लगाया है. यह आरोप कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता के आरोप के महीनों बाद लगाया गया. इस लिस्ट में विभिन्न मीडिया हाउस द्वारा होस्ट किए गए एक दर्जन से अधिक समाचार कंटेंट और कार्यक्रम शामिल हैं.
जिन 5 लाइव शो का जिक्र किया जा रहा है, वह ट्रूडो द्वारा बिना किसी सबूत के भारत के खिलाफ आरोप लगाने के बाद प्रसारित हुआ था. विदेशी हस्तक्षेप का अध्ययन करने के लिए बनाए गए कनाडाई आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम मोदी से जुड़े ऐसे चैनल पीएम ट्रूडो, भारत में कनाडा के उच्चायुक्त, कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों, कनाडा के पंजाबी सिख प्रवासी और हरदीप सिंह निज्जर की राजनीतिक मान्यताओं को निशाना बना रहे हैं.
कनाडाई पत्रकार ने भारत किया समर्थन शिव अरूर ने गुरुवार के शो के दौरान इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट किया और कहा कि यह मेरा वादा है. मैं उन पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखूंगा, चाहे ट्रूडो कितनी भी लिस्ट जारी करें. शो में शामिल हुए कनाडाई पत्रकार डैनियल ब्रॉडमैन ने भारतीय मीडिया पर आरोप लगाने के कनाडा के कदम को हास्यास्पद बताया. कनाडा के द नेशनल टेलीग्राफ के वरिष्ठ संवाददाता ब्रॉडमैन ने कहा, 'यह दावा करना कि एक सहयोगी देश का मीडिया विदेशी प्रभाव में खबरें दिखा रहा है, कनाडा का एक बहुत ही बेतुका दावा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.

ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?








