
ऑर्गन डोनेशन में डोनर तक सिमटकर रह गया है महिलाओं का रोल, क्यों भारत के अलावा अमेरिका तक यही पैटर्न?
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जीवित रहते हुए महिलाएं सबसे ज्यादा अंगदान करती हैं, वहीं रिसीवर के तौर पर वे सबसे पीछे हैं. नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन ने लगातार पांच सालों तक स्टडी के दौरान ये पैटर्न देखा. इसमें पाया गया कि महिलाएं आमतौर पर अपने रिश्तेदारों को किडनी या लिवर देते हुए जरा भी नहीं झिझकतीं, जबकि खुद जरूरतमंद होने पर भी अक्सर वे इससे वंचित रह जाती हैं.
देश में लिविंग ऑर्गन डोनर की बात करें तो महिलाएं इसमें पुरुषों से आगे हैं. अपने मेल पार्टनर से लगभग दोगुनी महिलाएं किडनी या लिवर जैसे अंग दान करती रहीं. नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) ने पाया कि दानकर्ताओं में सबसे आगे होने के बावजूद रिसीविंग एंड पर वे पीछे हैं. तो क्या महिलाएं अपनी इच्छा से ऑर्गन डोनेट कर रही हैं, या इसमें भी उनसे जबर्दस्ती की जा रही है? क्या यही पैटर्न बाकी देशों में भी दिखता है, या फिर यह भारत तक सीमित है?
क्या कहते हैं आंकड़े
NOTTO ने साल 2019 से 2023 तक अंगदान का डेटा देखा. इसमें पाया गया कि कुल अंगदान में 63 प्रतिशत महिलाओं का था, जबकि सिर्फ 27 प्रतिशत महिलाओं को ऑर्गन मिल सका. वहीं पुरुष डोनर बेहद कम थे, जबकि ऑर्गन पाने वाले पुरुषों की संख्या 70 प्रतिशत के करीब थी. दो साल पहले एक एनजीओ की रिसर्च और ज्यादा चौंकाती है. साल 2023 में मोहन फाउंडेशन के शोध में दावा किया गया कि ऑर्गन डोनर में 80 फीसदी महिलाएं हैं, जबकि पाने की पारी आने पर वे घटकर 18.9 फीसदी रह जाती हैं.
केंद्र ने अंगदान की प्रोसेस पर नजर रखने के लिए NOTTO का गठन किया. देश का हर अस्पताल, जहां अंग लिया या दिया जाता है, उसके लिए इस संस्था से जुड़ा होना जरूरी है. अंगदान में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए एक एक्ट भी बनाया गया. ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन एक्ट्स 1994 के अनुसार, कुछ निश्चित अंगों का दान किया जा सकता है. साथ ही इनका बेचा या खरीदा जाना अपराध है.
एडवायजरी में महिलाओं को प्राथमिकता
संस्था ने हाल में एक एडवायजरी भी निकाली. इसके तहत हर अस्पताल में ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर होना जरूरी है जो प्रोसेस पर लगातार नजर रख सके. साथ ही साथ एंबुलेंस स्टाफ को भी ट्रेनिंग दी जाएगी कि वे सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल लोगों को पहचान कर सकें ताकि अगर कोई अघट हो जाए तो समय रहते अंगदान हो सके. साथ ही एक और अहम बात जोड़ी गई. Notto ने एडवायजरी में कहा कि महिला मरीजों, और वो परिवार, जो अपने मृत रिश्तेदार का अंगदान कर चुके, अगर उन्हें ऑर्गन की जरूरत हो, तो उन्हें प्राथमिकता पर रखा जाए.

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