
एक होंगे गांधी परिवार के 2 भाई? कांग्रेस के ऑफर के बाद वरुण गांधी के अगले कदम पर नजर
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पीलीभीत से बीजेपी ने वरुण गांधी का पत्ता काट कर जितिन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया गया. इसके बाद अब सबकी नजरें वरुण गांधी के अगले कदम पर है. क्योंकि अपनी ही पार्टी और सरकार के खिलाफ बोलने वाले वरुण को लेकर बीजेपी ने अपनी चाल चल दी है. वरुण पीलीभीत से बीजेपी के सांसद हैं और जब उनका टिकट कटा तो कांग्रेस ने फायरब्रांड बीजेपी नेता को ऑफर देकर यूपी की राजनीति को गरमा दिया है.
क्या इस बार के लोकसभा चुनाव में 40 साल पुरानी पारिवारिक-सियासी दुश्मनी का खात्मा होने जा रहा है? बात गांधी परिवार की हो रही है, जिससे आने वाले वरुण गांधी को कांग्रेस में शामिल होने का पहला खुलेआम ऑफर दिया गया है. पीलीभीत से वरुण का टिकट कटा तो कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि वो गांधी होने की कीमत चुका रहे हैं. सवाल ये है कि क्या BJP और अपनी ही सरकार को हर मुद्दे पर घेरने वाले वरुण गांधी कांग्रेस में जा सकते हैं? मेनका गांधी और सोनिया गांधी के बीच शुरू हुई पारिवारिक रार अब वरुण और राहुल तक भी जारी है.
दरअसल, पीलीभीत से बीजेपी ने वरुण गांधी का पत्ता काट कर जितिन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया गया. इसके बाद अब सबकी नजरें वरुण गांधी के अगले कदम पर है. क्योंकि अपनी ही पार्टी और सरकार के खिलाफ बोलने वाले वरुण को लेकर बीजेपी ने अपनी चाल चल दी है. वरुण पीलीभीत से बीजेपी के सांसद हैं और जब उनका टिकट कटा तो कांग्रेस ने फायरब्रांड बीजेपी नेता को ऑफर देकर यूपी की राजनीति को गरमा दिया है. कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए वरुण गांधी को कांग्रेस में शामिल होने का जिस तरह न्योता दिया वो काफी अहम है.
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए वरुण गांधी को कांग्रेस में शामिल होने का ऑफर दिया है. अधीर रंजन चौधरी ने कहा, 'वरुण गांधी को कांग्रेस में शामिल होना चाहिए. अगर वह कांग्रेस में आते हैं तो हमें खुशी होगी. वरुण गांधी एक कद्दावर और बेहद काबिल नेता हैं.' उन्होंने कहा कि उनका गांधी परिवार से संबंध है इसलिए बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया. हम चाहते हैं कि अब वरुण गांधी कांग्रेस में शामिल हो जाएं.
2009 में पहली बार सांसद ने वरुण
बता दें कि वरुण गांधी 2004 में BJP में शामिल हुए और 2009 में पहली बार सांसद भी बन गए. साल 2013 में वरुण गांधी को भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया और इसी साल पार्टी ने उन्हें पश्चिम बंगाल में भाजपा का प्रभारी भी बनाया. ये वो वक्त था जब यूपी की सियासत और भाजपा में वरुण का नाम प्रमुख नेताओं में था. यहां तक कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की दौड़ में भी उनका नाम लिया जाता था. लेकिन पार्टी और सरकार के खिलाफ उनकी तरफ से दिए गए बयानों ने पार्टी में उनकी स्थिति कमजोर कर दी और पिछले 10 सालों से पार्टी ने उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई.
वरुण का बीजेपी से मोहभंग हो रहा है?

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