
एक्स्ट्रा सेंट्रीफ्यूज, गुप्त लोकेशन और IAEA को सरप्राइज चेक की इजाजत नहीं... कैसे ईरान का 400 KG गायब यूरेनियम दुनिया को दे रहा टेंशन!
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IAEA का कहना है कि बॉम्बिंग के बाद उसके लिए ईरान के न्यूक्लियर साइट पर निरीक्षण मुश्किल हो गया है. क्योंकि वहां मलबा भरा पड़ा है, वहां बगैर फटे लाइव बम हो सकते हैं. वहीं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ कहते हैं कि ईरान के पास अज्ञात संख्या में एक्स्ट्रा सेंट्रीफ्यूज है और गुप्त लोकेशन पर हैं. अगर ईरान अपने 400 किलो यूरेनियम को किसी तरह यहां ले गया तो पूरा परिदृश्य ही बदल जाएगा.
वेपन ग्रेड के डेंजर लेवल तक पहुंच चुके ईरान के 400 किलोग्राम एनरिच यूरेनियम कहां है? ईरान के परमाणु स्थलों पर अमेरिकी हमलों के बाद गायब यूरेनियम की खोज के लिए "बिल्ली-चूहे" की रेस शुरू हो चुकी है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग (IAEA) पहले ही कह चुका है कि फोर्डो न्यूक्लियर प्लांट पर अमेरिकी हमले के बाद कितना नुकसान हुआ इसका आकलन करना मुश्किल है.
इससे जुड़े सवाल पर IAEA के चीफ राफेल ग्रॉसी ने अपने एक बयान से इजरायल, अमेरिका की चिंता और बढ़ा दी है. उन्होंने कहा कि यह बहुत संभव है कि फोर्डो के अंदर यूरेनियम को एनरिच करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संवेदनशील सेंट्रीफ्यूज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हों. लेकिन यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि ईरान के 9 टन समृद्ध यूरेनियम, जिसमें 400 किलो वेपन ग्रेड तक एनरिच हो गए थे, इस हमले में नष्ट हुए या नहीं.
पश्चिमी देशों की सरकारें अब यह पता लगाने में लगी हैं कि इस यूरेनियम का क्या हुआ?
रॉयटर्स ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के प्रयासों में शामिल एक दर्जन से अधिक वर्तमान और पूर्व अधिकारियों से बात की, जिन्होंने कहा कि बमबारी ने ईरान को अपने यूरेनियम भंडार को गायब करने के लिए एक आदर्श स्थिति दे दी है. इस सिलसिले में IAEA की कोई भी जांच संभवतः लंबी और कठिन होगी.
ओली हेइनोनेन, जो 2005 से 2010 तक IAEA के टॉप इंस्पेक्टर थे, ने कहा कि खोज में संभवतः क्षतिग्रस्त ढांचे से नमूना लेना काफी परेशानी भरा हो सकता है. हेइनोनेन IAEA में रहते हुए ईरान के परमाणु मुद्दे पर लंबे समय तक काम कर चुके हैं. वे अब वाशिंगटन में स्टिमसन सेंटर थिंक-टैंक में काम करते हैं.
उन्होंने कहा, "ऐसी सामग्री हो सकती है जिसे निकाल पाना मुश्किल हो, मलबे में दब गई हो और बॉम्बिंग के दौरान नष्ट हो गई हो.

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