
उस जंग की कहानी जब राजा का सिर काट ले गए फ्रेंच सैनिक, 128 साल बाद फ्रांस ने लौटाई 3 खोपड़ियां!
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बीच समंदर में स्थित मेडागास्कर लालची यूरोप की साम्राज्यवादी निगाहों से दूर एक मनोरम टापू था. लेकिन 18वीं सदी में जब यूरोपीय ताकतें अपनी सीमाओं का विस्तार करने के लिए समंदर की यात्रा पर थीं इसी दौरान उनके कदम इस द्वीप पड़े. पश्चिमी शक्तियों के कदम इस द्वीप पर क्या पड़े, यहां के स्थानीय लोगों की सुकून भरी जिंदगी में बवंडर आ गया.
एक लड़ाई हुई थी. 128 साल पहले. इस जंग में एक पक्ष ने दूसरे के राजा का सिर ही काट दिया और इस कटे सिर को जीत की ट्राफी के रूप में अपने देश ले गए. इतिहास का ये निर्णायक युद्ध हुआ था फ्रांस और मेडागास्कर के बीच. इस युद्ध में फ्रांसीसी सैनिकों ने मेडागास्कर के राजा का सिर ही काट दिया था.
हिंद महासागर की गोद में अफ्रीका के पूर्वी तट पर स्थित मेडागास्कर द्वीप पर हुई इस लड़ाई की चित्कार को स्थानीय जनजातियों ने आज भी अपनी यादों में सजों कर रखा है. ये जंग औपनिवेशिक विस्तार, सांस्कृतिक टकराव और स्थानीय प्रतिरोध की एक जटिल कहानी है.
मेडागास्कर की कहानी हम बताए इससे पहले आप जान लें कि फ्रांस ने 128 वर्ष बाद वो तीन मानव खोपड़ियां मेडागास्कर को लौटा दी है. इतने सालों से ये खोपड़ियां पेरिस संग्रहालय में रखी गई थीं. माना जाता है कि इसमें से एक खोपड़ी राजा टोयरा की है. फ़्रांस ने 1897 में मेडागास्कर में भयानक जनसंहार किया था, इस दौरान राजा को भी मार दिया गया था. उसी जनसंहार से तीन खोपड़ियों को विजय प्रतीक के रूप में फ़्रांस ले जाया गया था.
1897 जंग की कहानी
मेडागास्कर, गजब की जैव विविधता, जीवंत संस्कृतियों, माइग्रेशन, व्यापार और संघर्ष की लहरों से गढ़ा गया देश है. दुनिया के चौथे सबसे बड़े द्वीप मेडागास्कर के औपनिवेशिक अतीत को समझे बिना इसके वर्तमान को समझना मुश्किल है.
19वीं सदी की शुरुआत में मेडागास्कर का अधिकांश भाग स्थानीय मेरिना साम्राज्य के अधीन था. इसका नेता रदामा I नाम का राजा था. इस राजा ने ब्रिटिश साम्राज्यवादियों से दोस्ती की और ईसाई धर्म का प्रसार किया. बाद में उनकी विधवा रानावालोना I ने विदेशी हस्तक्षेप का विरोध किया लेकिन उनके निधन के बाद मेडागास्कर के यूरोप के साथ फिर से संबंध स्थापित हुए.

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