
उत्तर कोरिया ने किया क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण, एक हफ्ते में दो टेस्ट से बढ़ी सरगर्मी!
AajTak
उत्तर कोरिया ने एक हफ्ते में दूसरी बार क्रूज मिसाइलों के परीक्षण किया है, जिससे कोरियाई नौसेना के परमाणु हथियार में तेजी आएगी
उत्तर कोरियाई ने रविवार को एक हफ्ते में दूसरी बार अपनी नई क्रूज मिसाइलों के परीक्षण किया. इनको नई पनडुब्बी-लॉन्च क्रूज मिसाइल (एसएलसीएम) नाम दिया गया है, जिससे कोरियाई नौसेना के परमाणु हथियार में तेजी आएगी. साथ ही उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने पनडुब्बी से एक नई रणनीतिक क्रूज मिसाइल के परीक्षण प्रक्षेपण का निरीक्षण किया. दक्षिण कोरिया स्थित योनहाप समाचार एजेंसी केसीएनए और आधिकारिक रोडोंग सिनमुन अखबार ने कहा कि पूर्वी सागर के ऊपर आसमान में दो पुलवासल-3-31 मिसाइलें दागी गईं. इन क्रूज मिसाइल पुलह्वासल-3-31 ने पनडुब्बी से लॉन्च होने के बाद 7,421 सेकेंड और 7,445 सेकेंड तक हवा में रही, लेकिन यह नहीं बताया गया कि वे कितनी दूर तक उड़ीं या उन्हें पानी के ऊपर या नीचे से लॉन्च किया गया था.
परीक्षण रहा सफल: किम जोंग
पुलह्वासल-3-31 रणनीतिक क्रूज मिसाइल की एक नई पीढ़ी है, प्योंगयांग ने कहा कि उसने बुधवार को पहली बार येलो सागर की ओर कई मिसाइलें दागकर परीक्षण किया था. केसीएनए एजेंसी के अनुसार किम जोंग उन ने इस परीक्षण को सफल बताया है.
उत्तर कोरिया की सेना ने रविवार को कहा कि उत्तर ने उसके तट से कई क्रूज मिसाइलें दागीं, लेकिन विवरण नहीं दिया. पिछले हफ्ते कहा था कि उसने एक नई रणनीतिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया था, जिसमें संकेत दिया गया था कि इसे एक परमाणु हथियार ले जाने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन उस समय यह उल्लेख नहीं किया गया था कि इसे पनडुब्बी प्रक्षेपण के लिए विकसित किया जा रहा है.
पिछले साल भी किया था क्रूज मिसाइल का परीक्षण
प्योंगयांग के अनुसार, पिछले साल मार्च में उत्तर कोरिया ने दो क्रूज मिसाइलों का प्रक्षेपण किया था जो 1,500 किलोमीटर (930 मील) की उड़ान भरी थी, लेकिन विश्लेषकों ने कहा कि ऐसा मालूम होता है कि उन्हें जल स्तर से ऊपर लॉन्च किया गया था, जिससे हथियार छिपपाना मुश्किल है.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.








