
ईसा से 57 साल पहले हुआ एक महायुद्ध, फिर शुरू हुआ विक्रम संवत... जानिए हिंदुओं के नए साल की शुरुआत की कहानी
AajTak
संस्कृत के विद्वान रहे और भारत रत्न प्रोफेसर पांडुरंग वामन काणे ने अपनी पुस्तक 'धर्मशास्त्र का इतिहास' में विक्रमी संवत का जिक्र किया है. वह लिखते हैं कि 'विक्रम संवत सबसे वैज्ञानिक है पश्चिमी कैलेंडर में सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण और अन्य खगोलीय परिस्थितियों की कोई जानकारी पहले से नहीं मिलती है, जबकि विक्रम संवत बता देता है कि आने वाले किस दिन ग्रहण होगा.
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी आज से नवरात्र की शुरुआत तो हो ही रही है, इसके साथ ही शुरू हो रहा है नव संवत्सर यानी विक्रम संवत 2082. इसे हिंदू नववर्ष कहा जाता है और सनातन परंपरा के प्रतीक के रूप में काल गणना के लिए सबसे सटीक कैलेंडर के तौर पर जाना जाता है. दावा है कि विक्रम संवत सूर्य और चंद्र दोनों ही की गतियों पर आधारित सबसे सटीक कैलेंडर है, जिसमें 12 मास हैं और ग्रहों पर आधारित सात दिनों के सप्ताह की गणना की देन भी यही प्राचीन कैलेंडर है.
सटीक हैं विक्रम संवत के दावे विक्रम संवत के बारे में जो भी दावे किए जाते हैं, वह सटीक ही बैठते हैं, क्योंकि इसे बनाने वाले प्राचीन भारत के खगोल विद्या के जानकार आचार्य वाराह मिहिर थे. उन्होंने पृथ्वी की सूर्य के चक्कर लगाने की सही गणना कर, दिन और रात का समय निर्धारित किया और इसी आधार पर तिथियों को भी रखा. तिथियों की गणना पल, प्रतिपल, घटी, मुहूर्त और पहर में इतने सूक्ष्म तरीके से विभाजित है कि इसमें कहीं भी त्रुटि नहीं हो सकती है. विक्रम संवत अधिक वैज्ञानिक है, लेकिन उसे अव्यावहारिक और जटिल बताकर लागू नहीं किया गया जबकि नेपाल में विक्रम संवत ही प्रचलित है.
वैज्ञानिक सिद्धांतों पर खरा उतरता है विक्रम संवत संस्कृत के विद्वान रहे और भारत रत्न प्रोफेसर पांडुरंग वामन काणे ने अपनी पुस्तक 'धर्मशास्त्र का इतिहास' में विक्रमी संवत का जिक्र किया है. वह लिखते हैं कि 'विक्रम संवत सबसे वैज्ञानिक है पश्चिमी कैलेंडर में सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण और अन्य खगोलीय परिस्थितियों की कोई जानकारी पहले से नहीं मिलती है, जबकि विक्रम संवत बता देता है कि आने वाले किस दिन ग्रहण होगा, बल्कि यह गणना करके अगले कई वर्षों के भ ग्रहण बता देता है. यह ऋतुओं के साथ-साथ ग्रह नक्षत्रों की पूरी स्थिति को भी बताता है.''
विक्रम संवत में वर्ष को सौर वर्ष और मास को चंद्रमास कहते हैं. यहां यह भी बताना जरूरी है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से सिर्फ उत्तर भारत में ही नया वर्ष शुरू होता है. दक्षिण भारत में विक्रम संवत का नया वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष से शुरू होता है.
विक्रम संवत की शुरुआत कैसे हुई? सवाल उठता है कि विक्रम संवत की शुरुआत कैसे हुई और यह अस्तित्व में कैसे आया और किसने इसे कैलेंडर के तौर मान्यता देते हुए स्थापित किया? पौराणिक संदर्भों को देखें तो ब्रह्मपुराण में भी इसका जिक्र मिलता है. इसके अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही सृष् की शुरुआत का दिन माना जाता है. यह ब्रह्मा का भी पहला दिन है. इसी दिन भारतवर्ष में काल गणना की भी शुरुआत मानी जाती है. लेकिन, भारत में जो ग्रेगोरियन कैलेंडर प्रचलित है, उसकी शुरुआत ईसा मसीह के जन्म से मानी जाती है. विक्रम संवत, ईस्वी वर्ष से 57 वर्ष पहले शुरू होता है.
जैन ग्रंथ में भी होता है जिक्र विक्रम संवत की शुरुआत करने में एक प्रतापी राजा का नाम आता है, जिनका नाम था विक्रमादित्य. जैन ग्रंथ कल्काचार्य कथा की मानें तो विक्रम काल की स्थापना राजा विक्रमादित्य द्वारा की गई थी. इस ग्रंथ में उनके द्वारा किसी राजा पर विजय की बात भी दर्ज है, जिसका नाम आकाश बताया जाता है. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाती है कि वह राजा शक या हूण है. हालांकि, पुरातत्विद वी.ए. स्मिथ और डी.आर. भंडारकर का मानना रहा है कि, चंद्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की थी और इसी ने उस वक्त के कैलेंडर का नाम बदलकर 'विक्रम संवत' कर दिया था.

दिल्ली सरकार के बजट को लेकर मंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में किए गए बड़े आवंटन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बताया कि इस बार बजट में सबसे अधिक राशि शिक्षा के लिए निर्धारित की गई है, जो 19,000 करोड़ से ज्यादा है. इसके तहत स्मार्ट क्लासरूम, लाइब्रेरी और ICT लैब्स के विकास के लिए भी करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है. हालांकि मंत्री ने यह भी कहा कि ये आंकड़े केजरीवाल गवर्नेंस मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं और इससे कई सवाल खड़े होते हैं.

रैसी जिले के महोर क्षेत्र में रामाकुंडा मोड़ के पास एक प्राइवेट कार सड़क से फिसलकर खाई में गिर गई. हादसे में हकनवाज (22), उनकी बहन शहरीजा राहि (18) और उनके चचेरे भाई रफ़ाकत हुसैन (15) की मौत हो गई. पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका महोर अस्पताल में इलाज चल रहा है. ड्राइवर ने अंधे मोड़ पर नियंत्रण खो दिया था.

Harish Rana Dies: हरीश राणा को मिल गई 'इच्छामृत्यु', एम्स में 10 दिन भर्ती रहने के बाद ली आखिरी सांस
Harish Rana News: भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा का AIIMS में निधन हो गया. वे साल 2013 से कोमा में थे. सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिसके बाद अस्पताल में उनके लाइफ सपोर्ट को स्टेप वाइज हटाया गया. डॉक्टर सीमा मिश्रा की अगुवाई में विशेषज्ञ टीम ने पूरी प्रक्रिया पूरी की.

अहमदाबाद के लालदरवाजा इलाके में SDPI (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया) ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस की मंजूरी नहीं होने के कारण प्रदर्शन कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया. इस दौरान SDPI कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्का टकराव भी देखने को मिला. SDPI नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा में बहुमत के बल पर UCC बिल को मनमाने तरीके से पारित किया है और इसे मुस्लिम विरोधी बताया. मौके पर सुरक्षा बढ़ाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया.

पश्चिमी एशिया में युद्ध के बीच भारत की चिंताएं तेल और गैस सप्लाई को लेकर बढ़ी हुई हैं. प्रधानमंत्री ने ताजा हालात की जानकारी सदन में बोलते हुए देश को दी. अब आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कर्तव्य भवन-2 में अहम बैठक की है. करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में CDS और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद रहे, जिन्होंने होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चर्चा की. देखें वीडियो.








