
ईरान की अमेरिका-इजरायल से जंग के बीच सबसे बड़ा सवाल... चीन कहां है?
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ईरान युद्ध के दौरान चीन की भूमिका को लेकर बड़ा सवाल उठ रहा है. 25 साल के समझौते और बड़े निवेश के दावों के बावजूद बीजिंग ने सैन्य समर्थन से दूरी बनाए रखी है. विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ईरान का सहयोगी नहीं बल्कि आर्थिक कर्जदाता की तरह व्यवहार कर रहा है और अपने बड़े खाड़ी हितों को प्राथमिकता दे रहा है.
ईरान युद्ध के बीच एक बड़ा सवाल लगातार उठ रहा है कि चीन आखिर कहां खड़ा है. दुनिया के कई हिस्सों में यह धारणा बन चुकी थी कि चीन ईरान का सबसे बड़ा सहारा बनेगा. लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बता रहे हैं. मई 2025 में चीन के यीवू शहर से एक मालगाड़ी 15 दिन का सफर तय कर ईरान के बंदरगाह पहुंची थी. यह ट्रेन इनचेह बरून सीमा से होकर ईरान में दाखिल हुई. इसे बेल्ट एंड रोड परियोजना का बड़ा प्रतीक माना गया. इससे पहले मार्च 2021 में ईरान और चीन ने 25 साल का सहयोग समझौता किया था, जिसमें 400 अरब डॉलर के संभावित निवेश की बात कही गई थी. मार्च 2023 में चीन की मध्यस्थता में सऊदी अरब और ईरान के बीच संबंध सामान्य करने की घोषणा भी हुई थी.
ईरान युद्ध में चीन की भूमिका पर बड़ा सवाल
युद्ध शुरू होने से कुछ दिन पहले खबर आई थी कि ईरान चीनी निर्मित सीएम 302 एंटी शिप मिसाइल खरीदने की तैयारी में है. इन मिसाइलों की मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर बताई गई और इन्हें कम ऊंचाई पर तेज गति से उड़कर रक्षा तंत्र को चकमा देने में सक्षम बताया गया. इसके अलावा फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों की सैटेलाइट तस्वीरें एक चीनी ओपन सोर्स इंटेलिजेंस समूह मिजारविजन ने साझा की थीं. इससे यह धारणा बनी कि चीन इस बार ज्यादा खुलकर ईरान के साथ खड़ा हो सकता है.
25 साल का समझौता और 400 अरब डॉलर निवेश का दावा
लेकिन जब युद्ध शुरू हुआ और पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत हो गई, तब चीन की प्रतिक्रिया काफी हल्की रही. विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई अचानक बदलाव नहीं है. चाथम हाउस के अहमद अबौदौह का कहना है कि चीन ने कभी भी ईरान को सैन्य समर्थन देने का वादा नहीं किया. नीदरलैंड की ग्रोनिंगन यूनिवर्सिटी के विलियम फिगुएरोआ ने अपने शोध में लिखा है कि 25 साल के समझौते को जरूरत से ज्यादा बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया. उनके अनुसार इसमें ठोस अनुबंध या वित्तीय लक्ष्य स्पष्ट नहीं थे, बल्कि यह भविष्य की संभावनाओं का खाका भर था.
युद्ध शुरू होते ही चीन की नरम प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ उनका ऑपरेशन पूरी ताकत से जारी है. उन्होंने बताया कि अब तक 7,000 से अधिक ईरानी सैन्य ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है. ट्रंप ने कहा कि मिसाइल और ड्रोन फैक्ट्रीज सहित सभी सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाया गया है, और ईरान की नेवी और एयर फोर्स को भी पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. देखें वीडियो.

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अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर से भी पहले से जंग चल रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को पनाह दे रही है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. लेकिन तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है. दोनों देशों का झगड़ना चीन के हितों के खिलाफ जा रहा है जिसे देखते हुए उसने एक प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने सामने से उसे खारिज कर दिया है.

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना भारतीय दूतावास की अनुमति और संपर्क के किसी भी जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करें. दूतावास ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर लोगों को गंभीर लॉजिस्टिक और इमीग्रेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह सलाह अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच जारी की गई है. दूतावास ने भारतीयों से आधिकारिक संपर्क में रहने और हेल्पलाइन नंबरों पर मदद लेने की अपील की है. दूतावास ने कहा, 'हमें बताए बिना ईरान न छोड़ें'. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

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