
इजरायल के इस प्लान के खिलाफ एकजुट हुई मुस्लिम दुनिया, सऊदी ने कही ये बात
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गाजा पर कब्जे की इजरायली योजना के खिलाफ मुस्लिम देशों ने एकजुटता दिखाई है. ओआईसी की एक इमर्जेंसी बैठक में सदस्य देशों ने इजरायल के प्लान को खारिज कर दिया है. इसी के साथ ही मुस्लिम देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायल पर दबाव बढ़ाने का आह्वान किया है.
फिलिस्तीनियों के शहर गाजा पर इजरायल भीषण हमले कर रहा है जिसे लेकर पूरी दुनिया में उसकी आलोचना हो रही है. इजरायल ने दक्षिण गाजा के खान यूनिस स्थित नासेर अस्पताल पर हमला किया है जिसमें 5 पत्रकारों समेत कम से कम 20 लोग मारे गए हैं. इस हमले को चौतरफा आलोचना हो रही है और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस घटना पर दुख जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं. लेकिन आए दिन हो रही ऐसी घटनाओं और आलोचनाओं से नेतन्याहू का गाजा प्लान कमजोर नहीं पड़ा है. नेतन्याहू के इस प्लान के खिलाफ दुनिया के मुस्लिम देशों ने एक साथ आकर विरोध जताया है.
दुनिया के 57 मुस्लिम देशों के संगठन 'इस्लामिक सहयोग संगठन' (OIC) ने गाजा पर पूर्ण कब्जे के इजरायल के प्लान को खारिज कर दिया है. इस्लामिक देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान किया है कि फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई रोकने के लिए दबाव बढ़ाया जाए.
ओआईसी की इमर्जेंसी मंत्रीस्तरीय बैठक सोमवार को सऊदी अरब के जेद्दा में आयोजित हुई. बैठक के बाद जारी बयान में ओआईसी ने कहा, 'सदस्य देश गाजा पट्टी पर पूर्ण कब्जे और सैन्य नियंत्रण लागू करने के इजरायल के प्लान की कड़ी निंदा करते हैं. हम फिलिस्तीनी लोगों को जबरन विस्थापित करने के मकसद से किसी भी प्लानिंग को खारिज करते हैं.'
हाल ही में इजरायली पीएम नेतन्याहू ने कहा था कि वो 'ग्रेटर इजरायल' के दृष्टिकोण से बहुत जुड़े हुए हैं. ग्रेटर इजरायल शब्द इजरायली क्षेत्र की विस्तारवादी अवधारणा है जिसमें पूर्वी येरुशलम, वेस्ट बैंक, गाजा, सिनाई प्रायद्वीप, गोलान हाइट्स और अन्य पड़ोसी अरब देशों के कुछ हिस्से शामिल हैं.
इसकी अवधारणा नील नदी से फरात नदी तक फैली हुई है जिसमें इजरायल का मंसूबा लेबनान से सऊदी अरब के विशाल रेगिस्तान, भूमध्य सागर से फरात नदी (इराक) को अपने में मिलाने का है.
ग्रेटर इजरायल की अवधारणा लंबे समय से चली आ रही है जिसका मुस्लिम देश, खासकर अरब देश भारी विरोध करते हैं. ओआईसी के बयान में सदस्य देशों ने नेतन्याहू के कथित 'ग्रेटर इजरायल' संबंधी हालिया बयान को भी खारिज कर दिया. सदस्य देशों ने कहा कि यह 'चरमपंथी बयानबाजी, उकसावे और राज्यों की संप्रभुता के खिलाफ आक्रामकता का विस्तार है. यह बयान अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का उल्लंघन है.'

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