
इजरायल और हमास की जंग में हार चाहे किसी को मिले, लेकिन जीत सिर्फ ईरान की होगी!
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इजराइल और फिलिस्तीन के आतंकी समूह हमास के बीच छिड़ी जंग में हार कोई भी जाए, लेकिन जीत सिर्फ ईरान की होगी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस युद्ध का सबसे बड़ा फायदा ईरान को मिल सकता है. इसी वजह से यह दावा भी किया जा रहा है कि इजराइल पर अटैक करवाने में ईरान का भी हाथ है.
फिलिस्तीन के आतंकी समूह हमास के हमलों के बाद इजरायल की जवाबी कार्रवाई में दोनों ओर से करीब एक हजार लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 5 हजार से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं. हमास के हमलों के बाद ही इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध का ऐलान कर दिया था. उन्होंने सुरक्षा प्रमुखों की एक बैठक में कहा कि 'यह एक जंग है और हम ये जंग जीतेंगे. वहीं दूसरी तरफ से हमास भी रुकने के मूड में नहीं है और लगातार हमलावर हो रहा है.
इजरायल और हमास के बीच जंग को देखकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में मारकाट और ज्यादा बढ़ने वाली है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले कुछ सप्ताह में फिलिस्तीन के काफी आतंकी और यहां तक कि आम नागरिक भी इजराइल की सेना के शिकार हो जाएंगे. वहीं एक्सपर्ट्स का कहना ये भी है कि बेशक जंग में नुकसान तो दोनों ओर का ही होगा, लेकिन अगर इस युद्ध से किसी को फायदा मिलेगा, तो वह सिर्फ ईरान होगा.
दरअसल, पहले से ही कुछ विश्लेषकों यह दावा भी कर रहे हैं कि हमास के अटैक के पीछे ईरान का हाथ हो सकता है. कम से कम ईरान को हमास के हमले की निंदा करनी चाहिए थी, जो नहीं की गई.
एंटी अमेरिका, एंटी इजरायली देश ईरान साल 1979 में ईरान में तख्तापलट हुआ. इसे ईरान की सबसे बड़ी इस्लामिक क्रांति भी कहा जाता है. इस क्रांति में ईरान के मौजूदा शासक शाह रजा पहलवी को गद्दी से उतारकर शिया मुस्लिम नेता अयातुल्लाह खुमैनी ईरान के प्रमुख बन गए. अब जो शाह का शासन था, तो अमेरिका और इजरायल से संबंध भी ईरान के काफी अच्छे थे. लेकिन अचानक खुमैनी ने आकर सबकुछ बदल दिया और ईरान पूरी तरह से इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर दिया गया.
उस समय से ही खुमैनी के शासन को एंटी अमेरिकी और एंटी इजरायली कहा जाने लगा. खुमैनी की यह क्रांति सिर्फ ईरानी शासन के लिए नहीं बल्कि अमेरिका और उन सरकारों के खिलाफ भी थी, जिन्हें अमेरिका का सहयोग रहता है.
अमेरिका के समर्थन वाली इन सरकारों में इजरायल की सरकार सबसे प्रमुख थी, जो खुमैनी के आंखों में हमेशा से खटकती रही. खुमैनी के राज में ईरानी नेताओं का मानना है कि इजराइल और अमेरिका अनैतिकता, अन्याय, मुस्लिम समाज और ईरानी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं.

अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग का आज 25वां दिन है. एक तरफ कूटनीतिक बातचीत की हलचल तेज हुई है, तो दूसरी तरफ सैन्य हमले भी थम नहीं रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान के ऊर्जा और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर 5 दिन हमला ना करने का दावा किया लेकिन अब IRGC ने दावा किया है कि ईरान के 2 ऊर्जा ठिकानों को फिर से निशाना बनाया गया. इस बीच इजरायली पीएम नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत की और उसके बाद कहा कि ईरान और लेबनान पर हमले जारी रहेंगे. इजरायल लगातार लेबनान में हिज्बुल्ला के ठिकानों को निशाना बना रहा है. इस हमलों के बीच ये युद्ध भीषण रूप लेता जा रहा है. जंग को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बेहद मजबूत बातचीत हुई है और करीब करीब सभी बिंदुओं पर सहमति बन गई है. उन्होंने ये भी कहा है कि विटकॉफ और कुश्नर बातचीत कर रहे हैं. अगर इसी तरह बातचीत चली तो युद्ध खत्म हो सकता है. ट्रंप दावा कर रहे हैं कि मजबूत बातचीत रही लेकिन ईरान का कहना है कि कोई बातचीत नहीं हुई जब ट्रंप से पूछा गया कि विटकॉफ और कुशनर किससे बातचीत कर रहे हैं तो उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि हम उस व्यक्ति से बात कर रहे हैं, जिसे मैं सबसे अधिक सम्मानित और नेता मानता हूं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वो नेता ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खुमेनेई हैं तो ट्रंप ने कहा कि नहीं- वो सुप्रीम लीडर नहीं है, हमें ये भी नहीं पता कि वो जीवित हैं या नहीं.

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