
आतंकी हमले को 10 दिन बीते, कहां छिपे हैं पहलगाम के दोषी? अब उठ रहे ये सवाल
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पिछले 10 दिनों से सघन तलाशी चल रही है. जंगलों से लेकर रिहाइशी इलाकों तक कार्रवाई चल रही है.100 से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ हो चुकी है. कई संदिग्धों के घर उड़ा दिए गए. जांच एजेंसियां सुराग तलाशने में जुटी हैं. गुरुवार को नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी के डीजी भी पहलगाम के दौरे पर पहुंचे, 3 घंटे तक वहां जांच पड़ताल हुई लेकिन अभी तक वो दहशतगर्द हाथ नहीं आए हैं. अभी तक उन दहशतगर्दों के मददगार हाथ नहीं आए हैं.
पहलगाम में आतंकवादी हमला हुए 10 दिन बीत गए हैं. दस दिनों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है. दोनों देशों में सेनाओं की तैनाती की जा रही है. युद्धाभ्यास चल रहा है. नोटाम (नोटिस टू एयर मिशन) जारी हो रहा है. एयरस्पेस बंद हो रहे हैं. पाकिस्तान रोज कह रहा है कि हमला कभी भी हो सकता है. पाकिस्तान को पहलगाम का सबक कब और कैसे सिखाया जाएगा, ये हिंदुस्तान की सेना तय करेगी. पीएम मोदी ने सेना को फ्री हैंड दे दिया है लेकिन जिन आतंकवादियों के कारण दो मुल्क जंग के मैदान में आमने सामने खड़े हैं. वो कहां हैं?
पिछले 10 दिनों से सघन तलाशी चल रही है. जंगलों से लेकर रिहाइशी इलाकों तक कार्रवाई चल रही है.100 से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ हो चुकी है. कई संदिग्धों के घर उड़ा दिए गए. जांच एजेंसियां सुराग तलाशने में जुटी हैं. गुरुवार को नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी के डीजी भी पहलगाम के दौरे पर पहुंचे, 3 घंटे तक वहां जांच पड़ताल हुई लेकिन अभी तक वो दहशतगर्द हाथ नहीं आए हैं. अभी तक उन दहशतगर्दों के मददगार हाथ नहीं आए हैं.
हालत ये है कि पहलगाम के बाद पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को लेकर लोगों के मन में भय बैठा हुआ है. 48 टूरिस्ट डेस्टिनेशन बंद करने पड़े हैं क्योंकि वहां सुरक्षा का खतरा है. जब तक ये दहशतगर्द पकड़े नहीं जाते, जम्मू-कश्मीर में उनकी दहशत कायम रहेगी. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 10 दिन हो गए, आखिर पहलगाम के वो पापी कहां गए? क्योंकि मुंबई से लेकर पठानकोट तक और उरी से लेकर पुलवामा तक जिन दहशतगर्दों ने भारतीयों का खून बहाया वो यहीं मिट्टी में भी मिल गए. लेकिन पहलगाम के दहशतगर्द जिंदा हैं. ये क्यों जिंदा हैं और कब तक जिंदा रहेंगे? इस सवाल के जवाब का इंतजार पूरे हिंदुस्तान को है.
घने जंगलों में छिपे हैं आतंकी या कोई कर रहा मदद?
ऐसे में बड़े सवाल खड़े होते हैं कि क्या ये आतंकवादी घने जंगलों की प्राकृतिक गुफाओं में छिपे हैं या इन आतंकवादियों की मदद घने जंगलों में रह रहे ओवर ग्राउंड वर्कर कर रहे हैं? जांच एजेंसियां दोनों ही सूरत में आतंकवादियों को पकड़ने की जुगत में हैं. जंगलों में जांच का जो दायरा पहले 10 किलोमीटर में था, वो अब बहुत बड़ा कर लिया गया है.. और दूसरी बड़ी कार्रवाई ओवर ग्राउंड वर्कर्स के जरिये आतंकियों के तार तलाशने की है. क्योंकि सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों को पता चला है कि OGW ने आतंकियों को घटनास्थल की पूरी लोकेशन समझाई और एग्ज़िट प्लान में उनका साथ दिया है.
सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों को घटना के वक्त के दो बार अल्ट्रा स्टेट के सिग्नल मिले हैं, जिसके द्वारा मोबाइल को कनेक्ट करके ऑडियो और वीडियो कॉल या फिर मोबाइल SMS होता है. इसमें किसी भी प्रकार के सिम कार्ड की जरूरत नहीं पड़ती. एजेंसियां बैकलॉग डेटा कॉल डिटेल और बैंक अकाउंट भी चेक कर रही हैं. ओजीडब्ल्यू की धरपकड़ में जांच एजेंसियों ने पूरे जम्मू-कश्मीर में हुरियत के कई गुटों और जमात ए इस्लामी के समर्थकों के यहां छापेमारी भी की है.

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