
'अमेरिका के बिना NATO जीरो है', ट्रंप का यूरोपीय देशों पर तंज
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों की जमकर क्लास लगाई है. उन्होंने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में दावा किया कि उनके बिना नाटो अपना बिल तक नहीं भर रहा था. ट्रंप ने अपनी सैन्य ताकत का गुणगान करते हुए यूक्रेन की सुरक्षा का श्रेय भी खुद को ही दिया और कहा कि उनके दखल के बिना अब तक रूस यूक्रेन पर कब्जा कर लेता.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर तंज कसते हुए नाटो (NATO) को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, लेकिन उन्होंने आशंका जताई है कि अगर अमेरिका को जरूरत पड़ी तो सहयोगी देश उसकी मदद करेंगे या नहीं. ट्रंप ने ये बयान डेनमार्क की प्रधानमंत्री की गठबंधन टूटने वाली चेतावनी के बाद जारी किया है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के बिना NATO का कोई महत्व नहीं, क्योंकि यूएस के बिना चीन-रूस जैसे देशों के मन में नाटो का कोई डर नहीं है. डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि नाटो के बड़े प्रशंसकों को याद रखना चाहिए कि मेरे आने से पहले सदस्य देश जीडीपी का सिर्फ 2% रक्षा पर खर्च करते थे और ज्यादातर अपना बिल नहीं चुकाते थे. अमेरिका मूर्खतापूर्ण तरीके से उनका खर्च उठा रहा था.
नाटो के खर्च पर ट्रंप की नाराजगी ट्रंप ने दावा किया, 'मैंने सम्मानपूर्वक उन्हें 5% जीडीपी तक पहुंचाया, जिसे पहले हर कोई असंभव मान रहा था, लेकिन हो गया क्योंकि वे सब मेरे दोस्त हैं. गठबंधन के सभी देश उनके दोस्त हैं और अब वे समय पर भुगतान करते हैं.'
'अमेरिका के बिना शून्य है NATO' ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सहयोग के बिना रूस और चीन जैसे देशों के मन में NATO को लेकर कोई डर नहीं रह गया है. अमेरिका के दखल के बिना रूस अब तक पूरे यूक्रेन पर कब्जा कर चुका होता.
नोबेल न मिलने पर जताई नाराजगी
यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके हस्तक्षेप के बिना रूस पूरे यूक्रेन पर कब्जा कर चुका होता. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अकेले दम पर आठ युद्ध समाप्त किए हैं. हालांकि, उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि नाटो सदस्य नॉर्वे ने उन्हें इसके लिए नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया. ट्रंप ने कहा कि पुरस्कार मिलना न मिलना उनके लिए जरूरी नहीं है, बल्कि सबसे अहम बात ये है कि उन्होंने लाखों लोगों की जान बचाई है.
ट्रंप का NATO देश पर संदेह अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाटो का साथ देने की बात तो की, लेकिन संदेह जताया कि मुश्किल वक्त में सदस्य देश अमेरिका का साथ नहीं देंगे. ट्रंप का मानना है कि जरूरत पड़ने पर नाटो देश वाशिंगटन की मदद के लिए आगे नहीं आएंगे. उनके मुताबिक रूस और चीन केवल उसी अमेरिका का सम्मान करते हैं, जिसे उन्होंने फिर से महान बनाया है.

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